चंडीगढ़। पंजाब के सभी सरकारी, निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे लाखों बच्चों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए प्रशासन ने एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सूबे के तमाम शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) मानकों की व्यापक समीक्षा और सघन चेकिंग का दौर शुरू कर दिया गया है। इस औचक निरीक्षण के तहत राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को आगामी १० अगस्त तक सभी संस्थानों की फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं पर एक विस्तृत और पारदर्शी स्थिति रिपोर्ट तैयार करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस औचक ऑडिट से उन निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है, जो अब तक सुरक्षा मानकों में ढिलाई बरत रहे थे।
माननीय उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद शुरू हुआ महा-ऑडिट अभियान
पंजाब के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा की इस पूरी व्यवस्था को खंगालने का काम माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद शुरू हुआ है। बीते दिनों अदालत ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य के सभी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों का विस्तृत सेफ्टी ऑडिट करवाने के सख्त आदेश जारी किए थे। अदालत के इसी हंटर के बाद हरकत में आए प्रशासनिक अमले ने आनन-फानन में विशेष कमेटियों का गठन किया है, जो जमीनी स्तर पर जाकर संस्थानों में मौजूद आग बुझाने के यंत्रों और आपातकालीन रास्तों की बारीकी से जांच कर रही हैं।
सरकारी और निजी संस्थानों में उपलब्ध सुरक्षा इंतजामों का हो रहा आकलन
इस व्यापक जांच अभियान के अंतर्गत किसी भी प्रकार का भेदभाव न करते हुए सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों को दायरे में लिया गया है। जांच टीमें इस बात का विशेष रूप से आकलन कर रही हैं कि किसी भी आपातकालीन स्थिति या शॉर्ट सर्किट की घटना के दौरान क्या संस्थानों के पास आग पर तुरंत काबू पाने के आधुनिक साधन मौजूद हैं या नहीं। इसके साथ ही, संकरी गलियों में चल रहे कोचिंग सेंटरों और बहुमंजिला स्कूल भवनों में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए बनाए गए 'एग्जिट गेट' और वेंटिलेशन की व्यवस्था को भी कड़े पैमानों पर परखा जा रहा है।
बिजली निगम की टीमें भी शॉर्ट सर्किट और लोड क्षमता की कर रहीं जांच
इस महा-ऑडिट अभियान में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अधिकांश आगजनी की घटनाएं बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण ही होती हैं। बिजली निगम के तकनीकी विशेषज्ञ और इंजीनियरों की टीमें स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में लगे ट्रांसफार्मर, मुख्य बिजली के पैनल, वायरिंग की गुणवत्ता और स्वीकृत लोड क्षमता की सघन जांच कर रही हैं। यदि किसी संस्थान में क्षमता से अधिक एयर कंडीशनर या अन्य उपकरण चलते पाए गए या बिजली की तारें जर्जर हालत में मिलीं, तो उनके खिलाफ तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
१० अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने इस पूरे ऑडिट कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए १० अगस्त की अंतिम समय सीमा निर्धारित की है। इस तारीख तक सभी जिलों की कंपाइल रिपोर्ट उच्च न्यायालय के समक्ष पेश की जानी है, जिसके आधार पर कोर्ट भविष्य के लिए कड़े नियम तय कर सकता है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि तय समय सीमा के भीतर जिन संस्थानों की रिपोर्ट असंतोषजनक पाई जाएगी या जो सुरक्षा मानकों को पूरा करने में नाकाम साबित होंगे, उनके खिलाफ भारी जुर्माने के साथ-साथ मान्यता रद्द करने और संस्थान को तुरंत सील करने जैसी कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


