अंबिकापुर: अंबिकापुर (सरगुजा) के खरसिया रोड स्थित कुंडला वसुंधरा सिटी के 110 मकान मालिकों को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायालय ने भवनों को ढहाने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश तथा नगर पालिका निगम अंबिकापुर के आयुक्त द्वारा 7 दिसंबर 2016 को दिए गए आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
कुंडला वसुंधरा सिटी का निर्माण वसुंधरा बिल्डर्स द्वारा संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करने के बाद कराया गया था।
2007 में मिली अनुमति: नगर पालिका निगम अंबिकापुर ने 8 अगस्त 2007 को पहली बार भवन निर्माण की अनुमति दी थी।
2011 में नवीन आवेदन: 1 फरवरी 2011 को नए सिरे से निर्माण अनुमति हेतु आवेदन किया गया, जिसे प्रशासन द्वारा न तो खारिज किया गया और न ही विधिवत निपटाया गया।
निर्माणाधीन भवनों को मिली मंजूरी: 3 अगस्त 2011 को निगम आयुक्त ने लंबित आवेदन को संज्ञान में लेते हुए निर्माणाधीन मकानों को पूरा करने की अनुमति दी। रिकॉर्ड के अनुसार 4 जनवरी 2012 तक 140 मकान बनकर तैयार हो चुके थे।
प्रशासनिक आदेश पर सवाल: इसके बावजूद राज्य सरकार ने 4 जुलाई 2012 को मकानों को हटाने का आदेश जारी कर दिया। इसी आधार पर निगम आयुक्त ने 2016 में 110 मकान मालिकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
प्राकृतिक न्याय के नियमों का उल्लंघन
इन आदेशों के बाद रहवासियों में अपने आशियाने को लेकर गहरा डर बैठ गया था। प्रभावित लोगों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। अदालत ने पूरे मामले के दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास सभी आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध थे, लेकिन उन्होंने उन पर उचित विचार नहीं किया। बिना पक्ष सुने और तथ्यों की अनदेखी कर जारी किए गए आदेश को अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना।
रहवासियों को मिली स्थायी राहत
उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद वर्षों से बेदखली का सामना कर रहे 110 परिवारों का संकट टल गया है। राज्य शासन और नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी किए गए दोनों ही बेदखली आदेशों को कानून की कसौटी पर अमान्य करार देते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।


