More
    Homeराजस्थानजयपुरराजस्थान बॉर्डर पर तस्करी का हाईटेक नेटवर्क, ड्रोन से भेजे जा रहे...

    राजस्थान बॉर्डर पर तस्करी का हाईटेक नेटवर्क, ड्रोन से भेजे जा रहे हथियार और ड्रग्स

    श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के सामने पाकिस्तानी ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टर में ड्रोन के माध्यम से हेरोइन, विदेशी हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों की लगातार हो रही खेप ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में तैनात एंटी-ड्रोन प्रणालियों की सीमित रेंज के कारण तस्कर ऊंचाई और उड़ान के तरीके बदलकर सुरक्षा तंत्र को आसानी से चकमा दे रहे हैं।

    ड्रोन तस्करी और तकनीकी चुनौतियां

    पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन को अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ाकर भारतीय सीमा में प्रवेश कराया जाता है और खेप गिराने के दौरान उसे कम ऊंचाई पर लाकर वापस पाकिस्तानी सीमा में ले जाया जाता है। वर्तमान एंटी-ड्रोन सिस्टम की क्षमता कम होने के कारण उच्च ऊंचाई पर उड़ने वाले इन ड्रोन्स को समय पर ट्रैक और निष्क्रिय करने में मुश्किलें आ रही हैं। इस साल अनूपगढ़, खाजूवाला, रायसिंहनगर, रावला, करणपुर और हिंदुमलकोट जैसे क्षेत्रों में लगातार हेरोइन और आरडीएक्स जैसी खतरनाक सामग्री बरामद होना इस खतरे की पुष्टि करता है।

    इस साल अब तक ड्रोन के जरिए हुई प्रमुख बरामदगियां

    सीमावर्ती इलाकों में इस वर्ष सुरक्षा बलों द्वारा पकड़ी गई प्रमुख खेप का विवरण इस प्रकार है:

    • 10 जनवरी: अनूपगढ़, श्रीगंगानगर – 4 किलो हेरोइन

    • 11 फरवरी: खाजूवाला, बीकानेर – 2.25 किलो हेरोइन

    • 9 मार्च: रायसिंहनगर, श्रीगंगानगर – 6.4 किलो हेरोइन

    • 26 मार्च: रावला, बीकानेर सेक्टर – 10.8 किलो हेरोइन

    • 5 अप्रैल: करणपुर, श्रीगंगानगर – 12.167 किलो हेरोइन

    • 19 जुलाई: हिंदुमलकोट, श्रीगंगानगर – 1 किलो हेरोइन

    • 12 अक्टूबर: रावला, श्रीगंगानगर – 7 किलो संदिग्ध आरडीएक्स, 2 पिस्तौल और करीब 650 कारतूस

    बहुस्तरीय सुरक्षा और नए प्रस्ताव

    इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां गंभीर कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर सेक्टर के सांचू बॉर्डर पोस्ट पर अगले छह माह में एक प्रभावशाली एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित करने की घोषणा की थी, जिसके तहत चार स्तरीय सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने भी बीएसएफ की मौजूदा व्यवस्था के पूरक के रूप में श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों में अपना स्वतंत्र एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से बातचीत जारी है।

    स्थानीय नेटवर्क और संयुक्त खुफिया तंत्र की आवश्यकता

    विशेषज्ञों और पुलिस सूत्रों का मानना है कि केवल तकनीकी निगरानी से इस पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता। ड्रोन द्वारा गिराई गई खेप को उठाने के लिए पंजाब और राजस्थान के स्थानीय तस्कर सक्रिय रहते हैं। अक्टूबर माह में रावला क्षेत्र में मिले आरडीएक्स और हथियारों की खेप इस खतरे की गंभीरता को दर्शाती है। इसलिए, सीमा सुरक्षा बल (BSF), पुलिस, एएनटीएफ और खुफिया एजेंसियों के बीच एक मजबूत संयुक्त सूचना तंत्र का होना बेहद आवश्यक है ताकि तस्करों के स्थानीय नेटवर्क को समय रहते ध्वस्त किया जा सके।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here