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    मैनपाट में किसानों को बिना मुआवजा दिए बॉक्साइट की माइनिंग, ग्रामीणों का फूटा आक्रोश तो कंपनी ने हटाई मशीनें

    Mainpat News: छत्तीसगढ़ का ‘शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट में बॉक्साइट खदान का एक बार फिर से विरोध शुरू हो गया है. माझी जनजाति के किसानों का कहना है कि सीएमडीसी (CMDC) के द्वारा मां कुदरगढ़ी एल्युमिना कंपनी के माध्यम से बॉक्साइट की माइनिंग कराई जा रही है. 52 ऐसे किसान हैं जिनकी करीब 300 एकड़ जमीन पर है, लेकिन उन्हें बिना मुआवजा दिए ही बॉक्साइट का खनन शुरू कर दिया गया है. यही वजह है कि यहां विरोध शुरू हो गया है.

    क्या है पूरा मामला?
    मैनपाट के बरिमा ग्राम पंचायत में सीएमडीसी के द्वारा पहले माइनिंग का कार्य किया जाता था और इसके लिए 2023 तक के लिए लीज दिया गया था. जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग का कहना है कि लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है. उसके बावजूद यहां पर कुदरगढ़ी कंपनी के द्वारा किसानों के खेत में खुदाई की जा रही है. बड़ी-बड़ी मशीन लगाकर किसानों के खेत की मिट्टी को इधर-उधर फेंका जा रहा है, जबकि किसानों को इस माइनिंग का मुआवजा भी नहीं मिला है.

    यही वजह है कि माझी जनजाति के सैकड़ो की संख्या में किसान बॉक्साइट खदान में पहुंच गए और विरोध करना शुरू कर दिया. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने साफ तौर पर कहा कि अगर खदान से मशीनों को नहीं हटाया जाता है तो कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और कोई घटना होती है तो उसके लिए माइनिंग कंपनी और सीएमडीसी जिम्मेदार होगी.

    ग्रामीणों के गुस्सा को देखते हुए खदान से मशीनों को हटाया गया. वहीं, दूसरी तरफ किसानों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक उन्हें मुआवजा की राशि पूरी तरह नहीं दी जाती है तब तक मशीनों को नहीं चलने देंगे. उन्होंने सवाल भी उठाया है कि आखिर लीज की अवधि समाप्त होने के बाद आखिर फिर से माइनिंग का आदेश जारी किया गया. ये आदेश किसने जारी किया है और इसके लिए जनसुनवाई कब आयोजित की गई.

    जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग का कहना है कि पिछले महीने में जो जनसुनवाई हुई उस दौरान इस खदान को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी. ऐसे में उन्हें इस बात की आशंका है कि अधिकारियों की मिली भगत से गुपचुप तरीके से इस खदान को लेकर आदेश जारी किया गया है.

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