न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए दोहराया है कि परमाणु हथियारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने या ब्लैकमेल करने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत किसी भी तरह की परमाणु धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की निरस्त्रीकरण एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रथम समिति की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पाकिस्तान द्वारा एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने अपने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत यह तीखा जवाब दिया। जिनेवा में निरस्त्रीकरण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर सिंह बेदी ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अखंड और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सदैव शांति का समर्थक रहा है, लेकिन यदि गैर-जिम्मेदाराना आतंकी गतिविधियों के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तो शांति महज दो संकटों के बीच का एक अस्थाई विराम बनकर रह जाती है।
परमाणु हथियारों को लेकर भारत का रुख और वैश्विक चेतावनी
भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसकी तमाम सैन्य क्षमताएं विशुद्ध रूप से रक्षात्मक हैं और वे देश की संप्रभुता व सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप तय की गई हैं। ये क्षमताएं किसी भी देश के खिलाफ आक्रामक नीयत से नहीं बनाई गई हैं। अनमोल बेदी ने कहा कि परमाणु हथियारों को आम राजनीतिक हथकंडे की तरह इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की गीदड़भभकी देकर आतंकवाद विरोधी जवाबी कार्रवाई को सीमित करने की नाकाम कोशिशों से सीमा पर तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता है। भारत ने यह भी उजागर किया कि इस क्षेत्र में संकट पैदा करने की एक पुरानी रणनीति रही है—पहले उकसावे की आतंकी कार्रवाई करना, फिर अपनी संलिप्तता से साफ मुकर जाना और जब भारत की ओर से मुंहतोड़ जवाब मिले तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम बरतने की दुहाई देना। बेदी के अनुसार, जब सत्ता पर काबिज लोग जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होते, तो उनके अदूरदर्शी फैसलों की कीमत निर्दोष नागरिकों को चुकानी पड़ती है।
आतंकवाद पर भारत के तीन कड़े और स्पष्ट सिद्धांत
तत्काल और उचित जवाब: भारत की धरती या नागरिकों पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा और माकूल जवाब दिया जाएगा। देश अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कभी पीछे नहीं हटेगा।
परमाणु ब्लैकमेल से कोई डर नहीं: भारत किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा। परमाणु हथियारों का खौफ दिखाकर भारत को आतंकवाद के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता।
साजिशकर्ताओं और आतंकियों में कोई अंतर नहीं: भारत आतंकवाद के आकाओं, उसकी साजिश रचने वालों और उसे अंजाम देने वालों को एक ही तराजू में तोलता है। किसी तथाकथित गैर-सरकारी संगठन (Non-State Actor) या आतंकी गुट का सहारा लेकर हमला कराने से प्रायोजक देश अपनी सीधी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
'ऑपरेशन सिंदूर' और सिंधु जल समझौते पर भारत का सख्त बयान
वरिष्ठ राजनयिक अनमोल बेदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि पिछले वर्ष पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले के बाद भारत ने आत्मरक्षा के संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए लक्षित कार्रवाई की थी। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस कायरतापूर्ण हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इसके जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त किया था। भारत ने इन कार्यवाहियों को बेहद संतुलित और तनाव रोकने के उद्देश्य से की गई अनुशासित कार्रवाई बताया।
इसके साथ ही भारत ने ऐतिहासिक सिंधु जल समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संधि आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर की गई थी। कोई भी देश एक तरफ सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देकर और विश्वास को तोड़कर यह उम्मीद नहीं कर सकता कि उसे समझौते के लाभ निरंतर मिलते रहेंगे। पहलगाम हमले के बाद भारत ने साफ कर दिया था कि जब तक सीमा पार से जारी आतंकवाद का पूरी तरह और स्थायी रूप से खात्मा नहीं होता, तब तक यह समझौता स्थगित रहेगा।
परमाणु प्रसार के काले इतिहास पर पाकिस्तान का घेराव
भारत ने पाकिस्तान के विवादास्पद परमाणु वैज्ञानिक ए क्यू खान के कुख्यात परमाणु ब्लैक मार्केट नेटवर्क का मुद्दा उठाकर उसे कटघरे में खड़ा किया। बेदी ने कहा कि इसी अवैध नेटवर्क के इतिहास के कारण करीब दो दशक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को प्रस्ताव 1540 पारित करना पड़ा था। खान के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट परमाणु उपकरणों और तकनीकों की अवैध तस्करी में संलिप्त था। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इसे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करने वाले देशों के लिए 'वन-स्टॉप शॉप' करार दिया था। भारत ने जोर देकर कहा कि परमाणु सहयोग और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के मामलों में सभी जिम्मेदार देशों और आपूर्तिकर्ताओं को अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि यह सतर्कता केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि संपूर्ण वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।


