काठमांडू। नेपाल के दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित एवरेस्ट बेस कैंप के समीप एक दर्दनाक हवाई हादसा सामने आया है, जहां दो हेलीकॉप्टर लैंडिंग के दौरान आपस में टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस भीषण दुर्घटना में एक भारतीय नागरिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भारतीय मूल का एक अन्य विदेशी नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गया है। नेपाल पुलिस के अधिकारी मौसम तमांग ने बताया कि यह हादसा एवरेस्ट क्षेत्र में फिशटेल एयर और एयर डायनेस्टी कंपनियों के हेलीकॉप्टरों के आपस में टकराने के कारण हुआ।
लैंडिंग के दौरान टकराए दो हेलीकॉप्टर
नेपाल पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह हादसा सोलुखुम्बु जिले की खुम्बू पासांग ल्हामू ग्रामीण नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले फेरेचे इलाके में मंगलवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब 8:11 बजे घटित हुआ। दोनों निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टर लैंडिंग का प्रयास कर रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने से वे आपस में टकरा गए। फेरेचे क्षेत्र काठमांडू से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है और यह माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग में पड़ता है।
भारतीय नागरिक की मृत्यु और कई घायल
पुलिस इंस्पेक्टर मौसम तामांग के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक की पहचान वसंत कुमार बलरामरामाडु के रूप में हुई है, जो फिशटेल एयर के हेलीकॉप्टर में यात्रा कर रहे थे। वहीं, इसी हेलीकॉप्टर में सवार न्यूजीलैंड निवासी भारतीय मूल के 49 वर्षीय शैलेश कृष्ण पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आपातकालीन स्थिति में एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए काठमांडू के मेडिसिटी अस्पताल भेजा गया है। दुर्घटना में दोनों हेलीकॉप्टरों के नेपाली पायलट रवींद्र प्रजापति और प्रज्वल केसी भी घायल हुए हैं, जिन्हें उच्च स्तरीय उपचार हेतु काठमांडू स्थानांतरित किया गया है। मृतक भारतीय नागरिक के शव को लुकला के अस्पताल भिजवाया गया है।
दुर्गम पहाड़ियों और प्रतिकूल मौसम के बीच हवाई परिचालन की चुनौतियां
नेपाल के अति दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों, पर्वतारोहियों और रसद सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए छोटे हेलीकॉप्टरों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव अभियानों के लिए भी ये सेवाएं मुख्य साधन हैं। चूंकि नेपाल विश्व के 14 सबसे ऊंचे पर्वतों में से आठ पर्वतों का केंद्र है, जिनमें माउंट एवरेस्ट भी शामिल है, इसलिए प्रतिवर्ष हजारों विदेशी पर्यटक और पर्वतारोही यहां आते हैं। हालांकि, यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और अचानक बदलने वाला मौसम हवाई उड़ानों के लिए निरंतर जोखिम पैदा करता रहता है।


