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    India First Digital Census: 2026 से शुरू होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना

    नई दिल्ली। भारत की India First Digital Census का आधिकारिक ऐलान हो चुका है। गृह मंत्रालय ने पहली डिजिटल जनगणना के पहले चरण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत देशभर में जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। कोविड-19 के कारण टली जनगणना अब डिजिटल स्वरूप में पूरी की जाएगी, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी।

    90 साल बाद होगी जातिगत जनगणना

    इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इससे पहले आखिरी बार वर्ष 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी। यानी करीब 90 साल बाद देश में फिर से जाति की आधिकारिक गिनती होगी। दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 1,718.2 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    दो चरणों में होगी जनगणना प्रक्रिया

    India First Digital Census दो चरणों में पूरी की जाएगी।
    पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा, जिसमें घरों की सूची और आवास जनगणना की जाएगी। इसमें यह जानकारी जुटाई जाएगी कि मकान पक्का है या कच्चा, बिजली-पानी-शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।

    दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें देश की जनसंख्या की वास्तविक गणना की जाएगी।

    30 लाख कर्मचारी करेंगे डिजिटल डेटा कलेक्शन

    इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। पहले जहां कागज और कलम से डेटा इकट्ठा किया जाता था, वहीं अब मोबाइल ऐप और टैबलेट के जरिए जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए देशभर में करीब 30 लाख कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।

    क्यों जरूरी है जनगणना?

    जनगणना का मुख्य उद्देश्य देश में रहने वाले हर व्यक्ति की संख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और बुनियादी जरूरतों की जानकारी जुटाना है। भारत में पहली बार 1871 में जनगणना हुई थी। 1981 के बाद से हर 10 साल में यह प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती रही है।

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