जम्मू: जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से हो रही नापाक हरकतों के खिलाफ भारतीय सेना को एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। पुंछ जिले के केजी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर सतर्क जवानों ने घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को विफल कर दिया। सैन्य सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध हलचल दिखने के बाद जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी को मार गिराया। इस मुठभेड़ के बाद सेना ने पूरे जंगली इलाके की घेराबंदी कर दी है और बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई अन्य घुसपैठिया छिपा न हो।
राजौरी में मिला आतंकियों का पुराना ठिकाना, सामग्री बरामद
सीमा पर जारी तनाव के बीच राजौरी जिले में सुरक्षा बलों को एक और कामयाबी मिली है। सोमवार को पुलिस के विशेष अभियान दल (SOG) ने दारहल क्षेत्र के सारा-सिमली गली इलाके में एक गुप्त ठिकाने का भंडाफोड़ किया। तलाशी के दौरान वहां से ऐसी सामग्री मिली है, जो उस समय की बताई जा रही है जब घाटी में आतंकवाद अपने चरम पर था। बरामद किए गए सामान में 5 आईईडी बैटरियां, दूरबीन, पुराने बैग और कुछ डायरी कवर शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बरामदगी से पुराने आतंकी नेटवर्क और उनके ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी: शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
राजौरी में ही रविवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी के अवसर पर एक भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुर्जर मंडी चौक स्थित युद्ध स्मारक पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने उन वीर सपूतों को याद किया, जिन्होंने पिछले वर्ष सीमा पार से हुई भारी गोलाबारी के दौरान देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। मेजर जनरल कौशिक मुखर्जी ने शहीदों के साहस और बलिदान को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मशाल रैली से गूंजा राजौरी, युवाओं ने दिखाया जोश
शहीदों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों और सैन्यकर्मियों द्वारा निकाली गई भव्य मशाल रैली रही। यह रैली राजौरी के उन क्षेत्रों से होकर गुजरी, जो पिछले साल 10 मई को गोलाबारी से सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। इस रैली के माध्यम से युवाओं ने एकजुटता और देशभक्ति का संदेश दिया। सूबेदार मेजर पवन सिंह, हवलदार सुनील सिंह और अग्निवीर मुरली नायक जैसे शूरवीरों को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके राष्ट्र समर्पण को याद किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भारी मौजूदगी यह दर्शाती है कि घाटी में शांति और सुरक्षा के लिए सेना और जनता के बीच अटूट विश्वास बना हुआ है।


