More
    HomeबिजनेसJeera Price Hike: महीनेभर में 10% महंगा हुआ जीरा, किचन का स्वाद...

    Jeera Price Hike: महीनेभर में 10% महंगा हुआ जीरा, किचन का स्वाद पड़ सकता है प्रभावित

    बिज़नेस | देश में टमाटर के बाद जीरे की कीमतें किचन का स्वाद बिगाड़ने लगी हैं। पिछले कुछ दिनों में जीरे की कीमतों (Jeera Price Today) में 10 फीसदी का जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। केडिया एडवाजरी की जीरा रिपोर्ट (kedia advisory jeera report) के मुताबिक, जीरा के बड़े उत्पादक राज्यों में बुआई देर से हो रही है, जिसके चलते दुनियाभर में जीरे का संकट गहरा रहा है। और इसी वजह से जीरा लगातार महंगा होता जा रहा है।

    वर्तमान में जीरा की कीमतों 21,450 रुपए (214 रुपए प्रति किलोग्राम) (Jeera Rate Today) प्रति क्विंटल के पार चली गई हैं। इसके अभी और बढ़ने के अनुमान हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले 1-2 महीने में जीरा के भाव 20600-20200 तक आ सकते हैं। लेकिन ऊपर में 21800-22100 तक पहुंचने की संभावना मजबूत है। अगर बुआई कम हुई तो आगे 23800-25200 रुपए तक जाने की संभावना है।

    केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, गुजरात और राजस्थान, दोनों प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस बार मौसम गड़बड़ा गया। खेतों में नमी ज्यादा रही। मिट्टी देर से सूखी। किसान बुआई शुरू नहीं कर पाए। गुजरात में अब जाकर बुआई 40,012 हेक्टेयर तक पहुंची है। यह पिछले साल से 126% ज्यादा है, लेकिन सामान्य के मुकाबले अब भी पीछे है। राजस्थान में हालात और खराब हैं। नमी के कारण बुआई धीमी है।

    20 लाख बोरी की गिरावट का अनुमान

    उधर उंझा मंडी (Unjha Mandi Jeera Bhav) में आवक बेहद कम है। यही मंडी जीरे का प्रमुख ट्रेडिंग हब है। कम आवक ने बाजार में और तेजी भर दी है। उत्पादन अनुमान भी चिंता बढ़ा रहा है। इस साल भारत का जीरा उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी से घटकर सिर्फ 90-92 लाख बोरी रहने का अनुमान है। यह सीधा 20 लाख बोरी की गिरावट है। बाजार में सप्लाई की कमी का यह सबसे बड़ा कारण है।

    अप्रैल-अगस्त में 17% गिरा जीरा निर्यात

    वैश्विक मोर्चे पर भी हालात अच्छे नहीं हैं। सीरिया, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों में मौसम और भू-राजनीतिक तनाव ने निर्यात के लिए उपलब्ध जीरा कम कर दिया है। इस ग्लोबल टाइटनेस का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। खाड़ी देशों और चीन से मांग थोड़ी लौटी है, लेकिन खरीदार कीमतों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। अप्रैल-अगस्त में भारत का जीरा निर्यात 17% गिरा। हालांकि अगस्त में हल्की रिकवरी हुई और निर्यात 3.24% बढ़ा। IPM ग्रेड जीरा बाजार में 20-25% प्रीमियम पर बिक रहा है। इसकी सप्लाई कम है। प्रीमियम क्वालिटी की इस कमी ने दाम और चढ़ा दिए हैं|

    इस साल 46 लाख शादियां बड़ा फैक्टर

    डिमांड साइड पर नवंबर से फरवरी के बीच शादी सीजन बड़ा फैक्टर है। इस साल 46 लाख शादियां होंगी। अनुमानित खर्च 6.5 लाख करोड़ रुपए के आसपास रहेगा। शादी का खाना मसालों पर टिका होता है। कैटरर्स 30-40% तक ज्यादा जीरा, हल्दी, मिर्च और मसाला मिक्स खरीदते हैं। इस सीजनल डिमांड ने बाजार में और सपोर्ट दिया है।

    डार्क स्टोर्स बदल दी मसालों की डिमांड

    पिछले कुछ सालों में Blinkit, Zepto, Instamart क्विक कॉमर्स डिलीवरी वाली कंपनियों ने अपने डार्क स्टोर्स तेजी से बढ़ाए हैं। 2019 में डार्क स्टोर्स की संख्या 150 से आसपास थी, जो साल 2024 तक बढ़कर 4000 से ज्यादा हो गए हैं। इंस्टेंट डिलीवरी ने मसाले और रेडी-टू-कुक मिक्स की बिक्री बढ़ा दी है। 2026 तक 6,000+ डार्क स्टोर्स से ब्रांडेड मसाला मांग और बढ़ेगी।

    आम घरों पर क्या असर?

    जीरा महंगा होने का सीधा असर किचन के बजट पर पड़ेगा। दाल-चावल से लेकर सब्जियों और मिक्चर मसाला तक, हर जगह जीरे का इस्तेमाल होता है। FMCG कंपनियां भी लागत बढ़ने पर पैकेट के दाम बढ़ा सकती हैं। शादी सीजन में होटल और कैटरिंग के रेट भी बढ़ सकते हैं। कुल मिलाकर बुआई में देरी, उत्पादन में कमी, कम आवक, वैश्विक संकट और शादी सीजन, इन सभी फैक्टरों ने जीरे की कीमतों में उछाल ला दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ महीनों जीरे कीमतें महंगी होंगी और उनमें नरमी की संभावना कम है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here