RIMS land scam investigation को लेकर रांची में कार्रवाई तेज हो गई है। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जा और निजी व्यक्तियों के नाम म्यूटेशन के मामले की जांच बुधवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस जांच की जिम्मेदारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी गई है। एसीबी की टीम ने बड़गाईं अंचल कार्यालय और रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर जमीन से जुड़े अहम दस्तावेजों की गहन जांच की।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, RIMS land scam investigation के दौरान दस्तावेजों, बयानों और रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किन लोगों और अधिकारियों की भूमिका से रिम्स की सरकारी जमीन का म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन निजी नामों पर हुआ। जांच का उद्देश्य पूरे नेटवर्क को उजागर करना और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।
इस क्रम में एसीबी टीम ने रिम्स प्रबंधन से भी विस्तृत पूछताछ की। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ और संपदा पदाधिकारी डॉ. शिव प्रिये से यह जानकारी ली गई कि रिम्स की कितनी जमीन पर अतिक्रमण है, कितनी जमीन अब तक खाली कराई जा चुकी है और अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस की प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। नोटिस चस्पा करने से जुड़े दस्तावेज भी जांच टीम ने जब्त किए हैं। इसके अलावा, जिन लोगों के घर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में टूटे हैं, उनके बयान भी दर्ज किए गए।
RIMS land scam investigation में दोषी अफसरों की पहचान पर खास फोकस है। एसीबी का कहना है कि ठोस दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


