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    चैंपियंस लीग रद्द करने के बाद शुरू हुआ विवाद, ललित मोदी ने सुनाया किस्सा

    इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने साल 2008 में चैंपियंस लीग टी20 (CLT20) के अचानक रद्द होने को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। एक हालिया बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उस समय टूर्नामेंट को बंद करने के फैसले की वजह से दुनिया के सबसे बड़े मीडिया कारोबारी रूपर्ट मर्डोक उनके जानी दुश्मन बन गए थे। गौरतलब है कि इस वैश्विक प्रतियोगिता का पहला सीजन 3 से 10 दिसंबर 2008 के बीच खेला जाना तय हुआ था, लेकिन 26/11 को मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा कारणों के चलते इसे पहले टाला गया और बाद में पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। इसके बाद इस टूर्नामेंट का पहला सीजन साल 2009 में खेला जा सका था।

    करोड़ों डॉलर के नुकसान से बिगड़े संबंध

    ललित मोदी ने बताया कि उन्होंने चैंपियंस लीग टी20 के सैटेलाइट और ब्रॉडकास्टिंग राइट्स (प्रसारण अधिकार) रूपर्ट मर्डोक के बड़े मीडिया नेटवर्क को भारी-भरकम कीमत पर बेचे थे। अचानक टूर्नामेंट के रद्द हो जाने से मर्डोक के मीडिया समूह को भारी आर्थिक चोट पहुंची, जिसके बाद दोनों के व्यावसायिक रिश्तों में बड़ी दरार आ गई। मोदी ने कहा, "चैंपियंस लीग के अधिकार मर्डोक को बेचने के कारण वे मेरे दूसरे सबसे बड़े विरोधी बन गए थे।"

    'नुकसान के बावजूद मर्डोक को देना पड़ा पूरा पैसा'

    पूर्व क्रिकेट प्रशासक का दावा है कि भले ही प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हो सका, लेकिन कानूनी एग्रीमेंट (अनुबंध) की शर्तों के कारण ब्रॉडकास्टर को पूरा भुगतान करना पड़ा। ललित मोदी के अनुसार, नियमों के तहत जैसे ही हिस्सा लेने वाली टीमें तय स्थान पर पहुंच जाती हैं, कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह प्रभावी हो जाता है। उन्होंने कहा, "मैंने 2008 की चैंपियंस लीग रद्द कर दी थी, जिससे उन्हें करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ। इसके बावजूद उन्हें हमें पैसे देने पड़े क्योंकि टीमें वेन्यू पर आ चुकी थीं। बाद में जब मैं पद से हट गया, तब भी रूपर्ट ने मुझ पर इस अनुबंध को हमेशा के लिए खत्म करने का दबाव बनाया और इसके बदले मोटी रकम की पेशकश की। मैंने वह सेटलमेंट स्वीकार किया, लेकिन इस प्रक्रिया ने मेरे दुश्मनों की लिस्ट में एक और बड़ा नाम जोड़ दिया।"

    'बाहुबली विरोधियों के आगे पीछे हटना ही बेहतर था'

    क्रिकेट बोर्ड में अपने रसूख के दिनों को याद करते हुए ललित मोदी ने कहा कि वक्त बदलने के साथ खेल और व्यापार जगत की कई बड़ी व प्रभावशाली हस्तियां उनके खिलाफ एकजुट हो गई थीं, जिनसे अकेले लोहा लेना असंभव था। उन्होंने स्वीकार किया कि जब इतने रसूखदार लोग आपके पीछे पड़ जाएं, तो आपके पास लड़ने के विकल्प सीमित हो जाते हैं। ऐसे हालात में समझदारी इसी में होती है कि आप कदम पीछे खींच लें और परिस्थितियों को उनके हाल पर छोड़ दें।

    फुटबॉल की तर्ज पर शुरू हुआ था टूर्नामेंट, पर रहा फ्लॉप

    चैंपियंस लीग टी20 की परिकल्पना यूरोप के मशहूर फुटबॉल टूर्नामेंट 'यूएफा चैंपियंस लीग' की तर्ज पर की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया की अलग-अलग टी20 लीग्स की विजेता टीमों को एक मंच पर लाकर उनके बीच मुकाबला कराना था। ईएसपीएन और स्टार स्पोर्ट्स ने इसके ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग और कमर्शियल राइट्स खरीदे थे। हालांकि, भारत के बाहर इस टूर्नामेंट को क्रिकेट प्रेमियों का वैसा समर्थन नहीं मिला और लगातार गिरती टीआरपी व लोकप्रियता के कारण भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने साल 2015 में इस लीग को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला किया।

    विदित हो कि ललित मोदी आईपीएल के शुरुआती दौर में लगे वित्तीय घोटालों, अनुशासनहीनता और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोपों के चलते इस समय बीसीसीआई द्वारा लगाए गए आजीवन प्रतिबंध का सामना कर रहे हैं।

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