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    कुरुक्षेत्र से खजुराहो के यात्रियों की चमकी किस्मत: नई तकनीक वाले एलएचबी कोच से लैस हुई गीता जयंती एक्सप्रेस, कम लगेंगे झटके

    कुरुक्षेत्र | यदि आप नियमित रूप से गीता जयंती एक्सप्रेस से यात्रा करते हैं और आगामी दिनों में आपको रेलवे स्टेशन पर पारंपरिक डिब्बों की जगह लाल रंग के आधुनिक कोच दिखाई दें, तो हैरान होने की आवश्यकता नहीं है। उत्तर रेलवे ने मुसाफिरों की सहूलियत, हिफाजत और सफर को शानदार बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। रेलवे प्रशासन ने कुरुक्षेत्र से खजुराहो के बीच प्रतिदिन चलने वाली गाड़ी संख्या 11841/11842 (कुरुक्षेत्र-खजुराहो-कुरुक्षेत्र) गीता जयंती एक्सप्रेस के पुराने आईसीएफ (ICF) कोचों को हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक एलएचबी (LHB) रैक लगा दी है। इस बदलाव के बाद अब यात्री कुरुक्षेत्र से खजुराहो तक की लगभग 822 किलोमीटर की दूरी बेहद सुरक्षित और आरामदायक तरीके से पूरी कर सकेंगे। बता दें कि यह ट्रेन फरीदाबाद, पलवल, होडल और कोसीकलां जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकती है।

    जर्मन तकनीक से लैस हैं नए कोच, दुर्घटना के समय रहेगा कम खतरा

    रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नए जर्मन तकनीक पर आधारित एलएचबी कोच सुरक्षा के पैमानों पर पुराने डिब्बों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आधुनिक और मजबूत हैं। इन नए डिब्बों की सबसे मुख्य विशेषता इनकी 'एंटी-टेलीस्कोपिक' प्रणाली है। इस तकनीक की वजह से किसी भी अप्रिय हादसे या ट्रेन के बेपटरी होने की स्थिति में डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों के हताहत होने की आशंका न के बराबर हो जाती है। इसके अलावा, एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि यदि ट्रेन किसी स्टेशन या आउटर पर खड़ी भी रहेगी, तब भी कोच के भीतर लगे पंखे और लाइट पूरी क्षमता से चलते रहेंगे, जो पुराने डिब्बों में संभव नहीं था।

    झटके और शोर से मिलेगी मुक्ति, आग लगने पर खुद रुक जाएगी ट्रेन

    तकनीकी जानकारों ने बताया कि एलएचबी कोचों में उन्नत सस्पेंशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जो तेज रफ्तार के दौरान भी ट्रेन के भीतर होने वाले कंपन (वाइब्रेशन) और खड़खड़ाहट की आवाज को काफी कम कर देता है। इससे यात्रियों को शांत वातावरण में आरामदायक सीटों पर सफर का आनंद मिलेगा और झटके भी महसूस नहीं होंगे। सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए इन नए कोचों में आधुनिक स्मॉग डिवाइस (धुआं संसूचक प्रणाली) लगाई गई है। यदि ट्रेन के अंदर किसी भी वजह से धुआं उठता है या आग लगने की नौबत आती है, तो यह सिस्टम सक्रिय हो जाएगा और ट्रेन में ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाएंगे।

    कोचों की कुल संख्या में बदलाव नहीं, आंतरिक व्यवस्था में फेरबदल

    रेलवे प्रशासन के मुताबिक, ट्रेन में डिब्बों की कुल संख्या पहले की तरह 22 ही रखी गई है, लेकिन यात्रियों की मांग और सुविधा को देखते हुए अलग-अलग श्रेणियों के डिब्बों के समीकरण में आंशिक बदलाव किया गया है:

    • सामान्य श्रेणी: साधारण द्वितीय श्रेणी (जनरल) के डिब्बों की संख्या को 10 से घटाकर अब 7 कर दिया गया है। वहीं, जनरल सीटिंग-कम-लगेज डिब्बों की संख्या को 5 से बढ़ाकर 6 कर दिया गया है।

    • एसी श्रेणी: वातानुकूलित सफर को सुगम बनाने के लिए एसी चेयर कार की संख्या को 3 से बढ़ाकर 4 किया गया है। इसके साथ ही, सामान और वातानुकूलित यात्रा के बेहतर तालमेल के लिए 2 नए 'लगेज-कम-एसी चेयर कार' कोच शामिल किए गए हैं।

    • अन्य बदलाव: पुराने रैक में चलने वाले 'फर्स्ट एसी-कम-चेयर कार' को अब नए बेड़े से हटा दिया गया है। इसके स्थान पर नई रैक में 1 पावर कार, 1 लगेज-कम-गार्ड डिब्बा और 1 अतिरिक्त बोगी को जोड़ा गया है।

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