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    बर्फीली फिजा छोड़ विदेशी बुलबुल, छोटा बाज और 7 बहनें बनी छिंदवाड़ा की दिलरुबा, बर्ड जोन में सुरखाब की कमी

    छिंदवाड़ा: भारत के कई राज्यों में सर्दी के सीजन में बर्फबारी होती है. ऐसे में कई तरह के पक्षी छुट्टियां बिताने कुछ दिनों के लिए छिंदवाड़ा के आस पास पहुंचते हैं. इनमें से कुछ खास किस्म के पक्षी इस बार छिंदवाड़ा में डेरा डाल चुके हैं. आइए जानते हैं देसी और विदेशी उन पक्षियों के बारे में जिनसे छिंदवाड़ा गुलजार हो रहा है.

    तालाबों के आसपास डाला डेरा

    पक्षी विशेषज्ञ मनीषा परिहार ने बताया "छिंदवाड़ा की जलवायु पक्षियों के लिए काफी अनुकूल है, जिसके चलते यहां के तालाबों के आसपास कई प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाला है. इनमें खास तौर पर भारतीय काली-धारी मैना, काला–सफेद मिश्रित रंग, तीखी आवाज और सामाजिक व्यवहार वाली यह प्रजाति खेतों एवं जलस्रोतों के पास आसानी से देखी जा रही है.

    सफेद-गला किंगफिशर

    तेज नीले पंख, लाल चोंच और सफेद गले वाला यह पक्षी भारत के सबसे आकर्षक किंगफिशरों में से एक है. यह छोटी मछलियों और कीड़ों का प्रमुख शिकारी है. रोज-रिंग्ड तोता, हरा चमकीला रंग और गर्दन पर गुलाबी रिंग इसकी पहचान है. जो अत्यंत बुद्धिमान और मानव आवाज की नकल करने में दक्ष है.

    सात बहनें

    यह पक्षी समूह में रहने के कारण 7 बहनों के नाम से जानी जाती है. भूरे रंग के आकार वाली पक्षी पूरे मध्य भारत में आमतौर पर देखा जाता है. इसके अलावा अलेक्जान्ड्राइन तोता काफी संख्या में छिंदवाड़ा में दिखाई देने लगे हैं. यह बड़े आकार का दुर्लभ तोता होता है. इसके पंखों पर कंधे के पास लाल पैच होता है. यह प्रजाति अब कई क्षेत्रों में कम देखी जाती है, इसलिए इसका दिखाई देना विशेष माना गया.

    लिटल ग्रीब या डबकी

    लिटल ग्रीब एक उत्कृष्ट गोताखोर जल पक्षी है. जो पानी के भीतर मछलियां पकड़ने में माहिर है. इस पक्षी को मछली पकड़ते हुए देखना खास अनुभव रहा. इसके अलावा इंडियन गोल्डन ओरियोल एक खास नस्ल का पक्षी है. चटक पीला रंग और काले पंख वाला यह पक्षी अत्यंत मनमोहक है. पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर बैठकर अपनी मधुर आवाज से जंगल को गुंजायमान करता है.

    शिकरा या छोटा बाज

    शिकरा एक तेज और फुर्तीला शिकारी पक्षी है. इसकी पहचान पीली आंखें, ग्रे सिर और सीने पर धारियों से होती है. छोटे पक्षियों व छिपकलियों का शिकार करता है. इसका दिखना पखड़ियां क्षेत्र की मजबूत जैव–संतुलन का संकेत है. प्लम-हेडेड तोता जो एक चमकीली हरी देह और गुलाबी-बैंगनी सिर वाला बेहद आकर्षक है. नर का सिर ज्यादा चमकीला होता है, मधुर आवाज और शांत स्वभाव इसे बर्ड फोटोग्राफरों में खास बनाते हैं.

    रेड वेंटेड बुलबुल

    रेड वेंटेड बुलबुल एक काले शिखर और पूंछ के पास लाल धब्बे वाली आम पक्षी है, लेकिन बेहद प्यारी प्रजाति है. यह फल, पराग और कीट खाती है तथा बीज फैलाकर जंगलों के प्राकृतिक विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देती है.

    भारत में अक्टूबर से मार्च तक रहते हैं विदेशी मेहमान

    पक्षी विशेषज्ञ मनीषा परिहार ने बताया "करीब 6 तरह के विदेशी पक्षी जो सर्दियों के सीजन में माइग्रेट होते हैं. उन्हें स्पॉट कर लिया गया है. यह लगभग अक्टूबर महीने में आते हैं और फरवरी के अंतिम तक यहां पर रहते हैं. इस दौरान विदेशी पक्षियों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के पक्षी भी बर्फबारी वाले इलाकों को छोड़कर छिंदवाड़ा पहुंचते हैं."

    दो पक्षियों ने बनीं चिंता का विषय

    सुरखाब जिसे कहावतों में भी सुना जाता है. वो पिछले साल तक छिंदवाड़ा में दिखते थे. इसे यूरोप में एक छोटा पक्षी ब्लू थ्रोट कहा जाता है. यह दोनों पक्षी इस साल नहीं दिखाई दे रहे हैं. जो एक चिंता का विषय है कि कहीं ना कहीं वह अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. इन प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए ग्रामीणों के साथ-साथ विभागों को भी पेड़ पौधे और पर्यावरण को बचाने के लिए पहल करनी होगी.

    रिसर्चरों के लिए है बेहतर डेस्टिनेशन

    पर्यावरण प्रेमी मोहित सूर्यवंशी ने बताया "छिंदवाड़ा जिले के प्रकृति प्रेमियों ने आज पखड़िया डैम कैचमेंट एरिया में बर्ड वाचिंग में प्रकृति की गोद में पहुंचे हैं. जो लगभग 30 से अधिक प्रजातियों के रंग–बिरंगे एवं सुंदर पक्षियों का प्रत्यक्ष देखे. छिंदवाड़ा शहर की भौगोलिक स्थिति, जो एक ओर पेंच नेशनल पार्क, दूसरी ओर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तथा आसपास के माचागोरा, तोतलाडोह एवं दूसरे तालाबों से घिरी हुई है. जो देशी एवं विदेशी पक्षियों के लिए अत्यंत अनुकूल निवास स्थान प्रदान करती है. यही कारण है कि यह क्षेत्र पक्षी–प्रेमियों और वन्य जीवन शोधकर्ताओं के लिए विशेष माना जाता है."

     

     

      पक्षी विशेषज्ञ अनुराग मिश्रा ने बताया "इस वर्ड वाचिंग कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जैव विविधता को समझना, पक्षियों की प्रजातियों की पहचान करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है. छिंदवाड़ा की घाटियां और जल स्रोत पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं. यदि ऐसे ही संरक्षण प्रयास जारी रहे तो भविष्य में यह क्षेत्र देश का एक प्रमुख बर्ड-वॉचिंग जोन बन सकता है. साथ ही पर्यटकों की संख्या भी बढ़ सकती है.

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