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    इन कोनों को खाली छोड़ना पड़ सकता है भारी, घर में प्रवेश कर सकती हैं बुरी शक्तियां!

    कई बार हम अपने घर में सजावट या जगह की कमी के चलते कुछ कोनों को खाली छोड़ देते हैं. हमें लगता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन वास्तु शास्त्र के हिसाब से ये छोटी सी गलती हमारे जीवन में बड़ी परेशानियों की वजह बन सकती है. वास्तु के नियम सिर्फ दिशा या निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये ऊर्जा के सही प्रवाह से भी जुड़े हैं. हमारे पूर्वजों का मानना था कि हर दिशा का अपना एक देवता और प्रभाव होता है, अगर उन दिशाओं को सही तरह से इस्तेमाल किया जाए तो घर में खुशहाली, सुख और समृद्धि आती है, लेकिन अगर हम इन्हें नजरअंदाज करें या खाली छोड़ दें, तो नकारात्मक ऊर्जा वहां जगह बना लेती है. अक्सर देखा गया है कि कुछ घरों में हमेशा तनाव, बीमारियां या पैसों की दिक्कत बनी रहती है. ऐसे मामलों में घर का वास्तु बड़ा कारण होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, घर के कुछ कोने ऐसे होते हैं जिन्हें कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि ये स्थान ऊर्जा के केंद्र होते हैं, अगर इन्हें साफ-सुथरा और सही तरह से सजाया जाए, तो न सिर्फ नकारात्मकता दूर होती है बल्कि जीवन में नई ऊर्जा भी आती है. जिनका खाली रहना घर के लिए अशुभ माना गया है.

    ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा)
    वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है और इसे भगवान शिव की दिशा माना गया है. यह घर का सबसे पवित्र हिस्सा होता है, इसलिए इस कोने को कभी भी खाली नहीं छोड़ना चाहिए, अगर यह स्थान खाली या गंदा रहता है, तो माना जाता है कि भगवान की कृपा नहीं मिलती और घर में नकारात्मकता बढ़ती है.

    आप चाहें तो इस दिशा में घर का मंदिर बना सकती हैं या एक छोटा पूजा स्थल रख सकती हैं. यहां अगर रोज दीपक जलाया जाए और सफाई रखी जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इस कोने को हमेशा हल्के रंगों से सजाएं और कोई टूटी-फूटी चीज़ न रखें.

    अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा)
    यह दिशा अग्नि देव की मानी जाती है और इसका संबंध ऊर्जा और ताकत से है. यहां रसोईघर बनाना सबसे शुभ माना गया है, अगर किसी वजह से यहां रसोई नहीं है, तो भी इस स्थान को खाली न छोड़ें. यहां कोई पौधा, दीपक या ऊर्जा से जुड़ी चीज़ रख सकते हैं.
    अगर यह कोना खाली या गंदा होगा, तो घर में झगड़े बढ़ सकते हैं और पैसों की रुकावट भी आ सकती है. आप चाहें तो यहां कोई सुंदर आर्टीफिशियल पौधा, दीवार पर सुंदर पेंटिंग या सुगंधित कैंडल रख सकती हैं. इससे इस दिशा की ऊर्जा बनी रहती है.
    नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा)
    नैऋत्य कोण को राहु और पितरों की दिशा कहा गया है, अगर यह कोना खाली रखा जाए या यहां कचरा इकट्ठा हो, तो रिश्तों में दूरी, घर में मतभेद और मानसिक तनाव बढ़ सकता है. इस दिशा में हमेशा भारी चीज़ें जैसे अलमारी या तिजोरी रखना शुभ माना जाता है.

    अगर यहां कोई टूटी या बेकार वस्तु पड़ी है, तो तुरंत हटा दें. कोशिश करें कि यह कोना हमेशा साफ-सुथरा रहे और हल्की खुशबू वाला अगरबत्ती या कपूर जलाते रहें. इससे पितरों की कृपा बनी रहती है और राहु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं.
    ब्रह्म स्थान (घर का बीचों-बीच हिस्सा)
    घर का मध्य भाग यानी ब्रह्म स्थान सबसे संवेदनशील होता है. यहां घर की सारी ऊर्जाएं मिलती हैं, अगर यह स्थान खाली या गंदा रहेगा, तो घर की सुख-शांति प्रभावित होती है. इस जगह पर भारी फर्नीचर या सामान न रखें, बल्कि इसे खुला और हल्का रखें.
    यहां साफ-सफाई का खास ध्यान रखें और कभी भी जूते, कपड़े या बेकार सामान न रखें, अगर चाहें तो इस स्थान पर छोटा सा झूला या सुंदर कारपेट बिछाकर बैठने की जगह बना सकते हैं. इससे घर में स्थिरता और शांति बनी रहती है.

    कुछ अतिरिक्त सुझाव
    1. घर के किसी भी कोने में जाले, कूड़ा या धूल न जमने दें.
    2. हर दिशा में हल्की खुशबू या कपूर जलाना शुभ माना जाता है.
    3. सुबह-शाम घर की सभी दिशाओं में रोशनी का प्रवाह बना रहे, इसका ध्यान रखें.
    4. टूटी चीजें, बंद घड़ी या बेकार इलेक्ट्रॉनिक आइटम तुरंत निकाल दें.

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