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    AC के तारों से लटकी जिंदगी, आग में घिरे बच्चों की रुला देने वाली कहानी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने न केवल 15 मासूम छात्रों की जिंदगी छीन ली, बल्कि पीछे छोड़ गया है रूह कंपा देने वाले मंजर और अपनों को खोने का कभी न खत्म होने वाला दर्द। शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने से लगी इस आग ने चंद मिनटों में पूरी तीन मंजिला इमारत को श्मशान बना दिया। ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और पहली मंजिल पर उसके वेयरहाउस में लगी आग जब दूसरी और तीसरी मंजिल पर चल रहे थ्री-डी एनीमेशन सेंटर और कोचिंग इंस्टिट्यूट तक पहुंची, तो वहां मौजूद बच्चों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था। इस भयावह हादसे के दौरान अंदर फंसे छात्रों की आपबीती और चश्मदीदों के बयान किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हैं।

    "पापा शायद आज न बच पाऊं…" — जब मौत के मुंह से जयंत ने किया फोन

    एनीमेशन सेंटर की पहली मंजिल की खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाने वाले 26 वर्षीय जयंत गुप्ता इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। खिड़की से छलांग लगाने के दौरान नीचे मुख्य गेट पर लगी लोहे की नुकीली सरिया उनकी कमर में गहरे तक धंस गई। अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें रक्त चढ़ाकर बचाने का प्रयास कर रही है।

    ऐशबाग स्थित एलडीए कॉलोनी के रहने वाले उनके पिता प्रदीप कुमार ने रुंधे गले से बताया, "मेरा बेटा अपने सुनहरे करियर का सपना लेकर इस सेंटर में आ रहा था, मुझे नहीं पता था कि यहां उसकी जान पर बन आएगी।" उन्होंने बताया कि हादसे के वक्त जयंत ने अंदर से फोन किया था। वह रोते और चीखते हुए बोला— 'पापा आज शायद मैं न बच पाऊं, चारों तरफ भीषण आग है और मैं फंस गया हूं।' यह सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। गनीमत यह रही कि जयंत को समय रहते ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां फिलहाल डॉक्टर उन्हें खतरे से बाहर बता रहे हैं।

    "मेरी जान तो बच गई, पर मेरा सबसे जिगरी दोस्त 'भविष्य' चला गया"

    उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला छात्र 'भविष्य' इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गया। उसका सहपाठी और पक्का दोस्त पंकज इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है और बार-बार फफक कर रो पड़ता है। उत्तराखंड से लखनऊ आकर एनीमेशन की दुनिया में कुछ बड़ा करने का सपना देखने वाले पंकज ने रोते हुए कहा, "हम दोनों ने एक साथ बैठकर अपने करियर के सपने बुने थे। हम साथ पढ़ते थे, साथ रहते थे। आज मेरी जान तो बच गई, लेकिन मेरा सबसे करीबी दोस्त हमेशा के लिए मुझसे छिन गया। हमारा वो सपना अब कभी पूरा नहीं होगा।" इस हादसे ने केवल सांसें नहीं छीनीं, बल्कि कई युवा दोस्तों के सपनों के संसार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।

    खिड़की से जलते हुए बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरे छात्र

    गढ़वाल (उत्तराखंड) के रहने वाले छात्र शैलेंद्र ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि आग लगते ही पूरे हॉल में इस कदर जहरीला और गाढ़ा धुआं भर गया कि एक हाथ की दूरी पर भी कुछ देखना असंभव था। मुख्य दरवाजा आग की लपटों से घिर चुका था, इसलिए भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था। जान बचाने के लिए छात्रों ने कुर्सियां फेंककर खिड़कियों के कांच के शीशे तोड़े।

    शैलेंद्र ने बताया, "कोई रास्ता न देख मैं खिड़की से बाहर लटका और नीचे जा रहे बिजली के तारों को पकड़कर उतरने लगा। वे तार भी आग की गर्मी से पिघल रहे थे और जल रहे थे, जिससे मेरे दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए।" शैलेंद्र ने दमकल विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आग लगते ही तुरंत फोन किया गया था, लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां करीब एक घंटे की देरी से पहुंचीं। अगर गाड़ियां समय पर आ जातीं, तो अंदर फंसे छात्रों का दम न घुटता।

    गले तक आ गया धुआं, छात्रों ने सोचा 'आज जिंदगी का आखिरी दिन है'

    सेंटर के छात्र आसिफ ने बताया कि दूसरी मंजिल पर हालात बिल्कुल नरक जैसे हो गए थे। गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेना दूभर था। आसिफ ने कहा, "मैंने सोच लिया था कि आज मेरी जिंदगी का आखिरी दिन है। मेरे साथ मौजूद सिर्फ 3-4 लोग ही किसी तरह खिड़की के रास्ते बाहर आ पाए, अंदर मौजूद मेरे बाकी साथियों का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। मेरी आंखों के सामने कई साथी तड़प-तड़प कर शांत हो गए।"

    बचाव के तरकीब भी हुए फेल: खुद को बाथरूम में किया बंद, नल खोलकर बैठे रहे

    बिल्डिंग के बाहर खड़ी स्थानीय लोगों की भीड़ अंदर फंसे बच्चों को देखकर पूरी तरह बेबस थी। कुछ युवकों ने बाहर से पत्थर मारकर कांच की खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की ताकि धुआं बाहर निकल सके, लेकिन तभी इमारत के ऊपर लगे भारी-भरकम लोहे के विज्ञापन बोर्ड (होर्डिंग्स) जलकर नीचे गिरने लगे, जिससे नीचे खड़े लोग भी पीछे हटने को मजबूर हो गए।

    अंदर फंसे कुछ समझदार छात्रों ने खुद को आग और धुएं से बचाने के लिए बाथरूम के भीतर बंद कर लिया। वे लगातार नल खोलकर अपने ऊपर और फर्श पर पानी गिराते रहे ताकि आग की तपिश उन तक न पहुंचे, लेकिन जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण कई छात्र वहीं अचेत हो गए।

    दिल दहला देने वाली मौत: छत से कूदा युवक, पेट में आर-पार हो गई रेलिंग

    हादसे का सबसे दर्दनाक और विचलित कर देने वाला नजारा तब देखने को मिला जब तीसरी मंजिल की छत पर लपटों से घिरे एक युवक ने जान बचाने की अंतिम कोशिश में नीचे छलांग लगा दी। बदकिस्मती से नीचे कूदते समय वह हवा में ही सीधे हाई-टेंशन बिजली के तारों से टकरा गया। करंट के झटके और असंतुलन के कारण वह सीधे नीचे बाउंड्री वॉल पर बनी लोहे की नुकीली रेलिंग पर जाकर गिरा। लोहे की नुकीली रॉड उसके पेट में पूरी तरह धंस गई। स्थानीय लोगों ने लोहे की जाली को काटकर लहूलुहान युवक को किसी तरह बाहर निकाला और अस्पताल भिजवाया, लेकिन अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    अग्निकांड की इस विभीषिका ने पूरे लखनऊ शहर को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर घटना की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है और अवैध रूप से बिना फायर एनओसी के चल रहे इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मालिकों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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