सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के सरसावा थाना क्षेत्र में सोमवार तड़के लखनऊ से आई स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी मुठभेड़ में ₹1.25 लाख के इनामी कुख्यात अपराधी ललन सिंह को मार गिराया। इस हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर ने एक बार फिर स्थानीय जिला पुलिस की खुफिया कार्यप्रणाली और मुखबिर तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर राजधानी लखनऊ से पहुंची एसटीएफ की टीम ने इस बेहद गोपनीय ऑपरेशन को अपने स्तर पर अंजाम दिया, जबकि स्थानीय सरसावा पुलिस को इसकी कानोंकान भनक तक नहीं लगी। जब मुठभेड़ लगभग खत्म हो चुकी थी, तब जाकर स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी हुई।
तड़के 3 बजे सरसावा-नकुड़ मार्ग पर गूंजी गोलियां
यूपी एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली थी कि साल 2022 में बिहार के पटना में पुलिस हिरासत से अपने दो भाइयों के साथ फरार हुआ कुख्यात अपराधी ललन सिंह अपने एक साथी के साथ सहारनपुर में किसी बड़ी डकैती या जघन्य वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। इस इनपुट के आधार पर सोमवार तड़के करीब तीन बजे एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय, आदित्य कुमार सिंह और उप निरीक्षक मनोज कुमार की विशेष टीम ने सरसावा-नकुड़ रोड पर नाकेबंदी कर वाहनों की चेकिंग शुरू की।
इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्धों को जब एसटीएफ ने रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ की जवाबी आत्मरक्षार्थ फायरिंग में ₹1.25 लाख का इनामी बदमाश ललन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। घायल बदमाश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस भीषण गोलीबारी के दौरान बदमाशों की गोलियां अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह और निरीक्षक आदित्य कुमार सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगीं, जिससे वे बाल-बाल बच गए।
दरोगा की हत्या और बैंक डकैती समेत दर्ज थे कई संगीन मामले
एसटीएफ के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, मारा गया बदमाश ललन सिंह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के आनंदगोलवा गांव का रहने वाला था। वह अपने भाइयों मनीश सिंह और रजनीश सिंह के साथ मिलकर एक अत्यंत क्रूर अंतर्राज्यीय गैंग चलाता था। उसके खिलाफ बिहार और उत्तर प्रदेश में 7 लोगों की हत्या, बैंक डकैती, कैश वैन से लूटपाट और सुरक्षाकर्मियों से सरकारी हथियार छीनने जैसे दर्जनों जघन्य मामले दर्ज थे।
ललन सिंह ने वाराणसी में एक उपनिरीक्षक (दरोगा) अजय यादव को गोली मारकर उनकी सर्विस पिस्टल लूटी थी। इसके अलावा वह पटना और नालंदा में दो अन्य पुलिस अधिकारियों की हत्या व हथियारों की लूट में भी नामजद था। वर्ष 2022 में वह पटना में न्यायिक हिरासत से भाग गया था, जिसके बाद वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने उस पर ₹1 लाख और चंदौली पुलिस अधीक्षक ने ₹25 हजार का नगद इनाम घोषित किया था। उसके दो भाई पहले ही अलग-अलग एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।
स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे हैं ये 3 बड़े सवाल
इस सफल मुठभेड़ के बाद सहारनपुर के स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बड़ी घटना है जब लखनऊ एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस को बिना बताए जिले में घुसकर किसी बड़े अपराधी का काम तमाम किया है। इससे पहले 20 दिसंबर को भी एसटीएफ ने गंगोह क्षेत्र में ₹1 लाख के इनामी बदमाश सिराज को ढेर किया था। इस घटनाक्रम से निम्नलिखित गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
पहला सवाल: बिहार का इतना बड़ा और कुख्यात अपराधी समस्तीपुर से चलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आकर छिप जाता है या रेकी करता है, इसकी खबर लखनऊ में बैठी एसटीएफ को मिल जाती है, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग (एलआईयू) को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगती?
दूसरा सवाल: ललन सिंह के साथ मौके से फरार हुआ उसका दूसरा साथी कौन है? क्या वह स्थानीय स्तर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कोई अपराधी है जो बिहार के इस गैंग को पनाह और रसद मुहैया करा रहा था?
तीसरा सवाल: पिछले छह महीनों के भीतर सुल्तानपुर के सिराज, इमरान, शहजाद, अहसान और अब बिहार के ललन सिंह के एनकाउंटर से क्या यह साबित होता है कि सहारनपुर और आसपास के इलाके अब पूर्वांचल तथा बिहार के खूंखार गैंग्स की नई शरणस्थली या कार्यक्षेत्र बनते जा रहे हैं?
फिलहाल, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें फरार बदमाश की तलाश में जंगलों और संभावित ठिकानों पर लगातार कॉम्बिंग व छापेमारी कर रही हैं। मारे गए बदमाश के शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर बिहार में उसके परिजनों को सूचना भेज दी गई है।


