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    बरेली में मिसाल बनी मोहब्बत: मुस्लिम समुदाय ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल

    बरेली में बवाल के लिए बदनाम जोगी नवादा के लोगों ने इस बार सौहार्द का वादा निभाया। दो साल पहले शाहनूरी मस्जिद के पास जहां बवाल हुआ था। दोनों पक्षों के पथराव के बाद पुलिस को लाठीचार्ज ओर हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। इस बार वहां अमन के फूल बरसे। जुमे की नमाज के बाद गली में भोले के जयकारे गूंज उठे। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न सिर्फ कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की, जत्थे को विदा करने के लिए झिझक की बेड़ियां तोड़कर मंदिर तक भी आए। पहले मुस्लिम भाइयों ने शाहनूरी मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की। इसके बाद जत्थेदार शिवनंदन शर्मा की अगुवाई में करीब डेढ़ सौ कांवड़िये भोले के जयकारे लगाते वहां पहुंचे तो मस्जिद के बाहर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। 50 मुस्लिम भाइयों ने इन पर पुष्प वर्षा की। 

    मुस्लिम पक्ष के लोगों ने कांवड़ियों को फूलमालाएं पहनाई और गले मिलकर स्वागत किया गया। सीओ समेत पुलिस टीम को भी इन लोगों ने फूलमालाएं पहनाईं तो पुलिस ने भी अमन के पैरोकारों का स्वागत किया। सभी पैदल वनखंडीनाथ मंदिर तक आए और शिवभक्तों को विदा किया। इसी दौरान बारिश भी शुरू हो गई। जलभराव के बीच जयकारे लगाते हुए कांवड़िये हरिद्वार के लिए रवाना हुए।

    पेड़ की डाल कटवाने से बदला माहौल

    विवाद की जड़ पीपल की डाल को छह महीने पहले पुलिस ने कटवा दिया था। इससे सड़क खोदकर ताजिया निकालने की 32 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई। इसके बाद से ही वहां माहौल बदलने लगा था। दरअसल, हिंदू पक्ष डाल को काटने नहीं देता था, जबकि मुस्लिम पक्ष ताजिये की ऊंचाई कम नहीं करता था। ऐसे में हर तनातनी होती थी। पिछले सप्ताह ताजिये का जुलूस निकला तो मौर्य गली में हिंदू पक्ष के लोगों ने फूलों की वर्षा की थी। अब मुस्लिमों ने जिम्मेदारी निभाई।

    इन्होंने किया स्वागत

    पूर्व पार्षद उस्मान व हाजी सरफराज, जुल्फिकार, जुबैर, मुश्ताक, सरताज और असलम समेत मुस्लिम पक्ष के करीब 50 लोग शामिल रहे। दूसरे पक्ष के लोगों में शिवनंदन शर्मा, महंत राकेश कश्यप, बनवारी लाल शर्मा, संजीव शर्मा आदि प्रमुख रहे। अब तीसरे सोमवार को जल लेने बनवारीलाल शर्मा के नेतृत्व में जत्था रवाना होगा। उम्मीद है कि दोबारा भी इसी तरह के माहौल के बीच कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। 

    कप्तान का हुआ था तबादला, पुलिसकर्मी हुए थे निलंबित

    दो साल पहले हुए बवाल के दौरान तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने लाठीचार्ज के आदेश दिए थे। उपद्रवियों ने एसएसपी के सामने तमंचे लहराकर फायरिंग की तो पुलिस की ओर से भी हवाई फायरिंग हुई थी। इसके बाद एसएसपी का तबादला कर दिया गया था। बारादरी के तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक सिंह समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। दोनों ओर के लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए थे।

    एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि जोगी नवादा में रहने वाले दोनो पक्षों के ज्यादातर लोग मेहनतकश हैं। बवाल के दौरान उनके काम-धंधे व परिवार प्रभावित हुए होंगे। मुकदमेबाजी में फंसने से मानसिक परेशानी और आर्थिक बोझ अलग से झेलना पड़ रहा होगा। इसलिए दोनों पक्षों ने मिल-जुलकर रहने और एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सहयोग करने का फैसला लिया है। पुलिस-प्रशासन उन्हें एक मंच पर ले आया। अब आगे सौहार्द कायम रखना स्थानीय लोगों की ही जिम्मेदारी है।

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