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    7 महीने की फरारी के बाद बड़ी कार्रवाई: डोडा चूरा तस्करी मामले में फंसे भाजपा विधायक के गनमैन की सरकारी सेवा समाप्त

    बारां | राजस्थान के बारां जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले महकमे में एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई सामने आई है। जिला पुलिस प्रशासन ने नशीले पदार्थों की तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क में संलिप्तता पाए जाने के बाद हेड कांस्टेबल शंकरराम को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से निष्कासित (बर्खास्त) कर दिया है। बर्खास्त खाकीधारी पर आरोप है कि उसने अपने राजकीय पद का दुरुपयोग करते हुए अंतरराज्यीय अपराधियों के साथ साठगांठ की और $97text{ Kilogram}$ से अधिक डोडा चूरा की अवैध खेप को ठिकाने लगाने में तस्करों की मदद की। आरोपी पुलिसकर्मी पिछले सात महीनों से अपनी ड्यूटी से नदारद है और गिरफ्तारी के डर से लगातार फरार चल रहा है।


    कार से बरामद हुआ था क्विंटल भर डोडा चूरा, जांच में खुली खाकीधारी की पोल

    इस पूरे काले कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए बारां के पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने बताया कि सदर थाना पुलिस ने पिछले साल 29 अक्टूबर 2025 को एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत एक सुनियोजित कार्रवाई की थी। इस दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध कार की तलाशी लेकर उसमें से $97text{ Kilogram 110 Gram}$ अवैध अफीम डोडा चूरा बरामद किया था। जब इस मामले की गहराई से तफ्तीश की गई, तो कड़ियों से कड़ियां जुड़ती गईं और अंततः हेड कांस्टेबल शंकरराम का नाम मुख्य सूत्रधार के रूप में सामने आया। जांच में यह सिद्ध हुआ कि आरोपी पुलिसकर्मी दूसरे राज्यों के ड्रग तस्करों के निरंतर संपर्क में था और अपने करीबियों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर इस अवैध खेप को नागौर जिले तक सुरक्षित पहुंचाने की साजिश रच रहा था।

    नोटिस का नहीं दिया जवाब, गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कोर्ट से जारी कराया वारंट

    तस्करी के इस गंभीर मामले में नाम उजागर होने के बाद से ही आरोपी हेड कांस्टेबल शंकरराम अपनी ड्यूटी से लगातार गायब चल रहा था। पुलिस विभाग की ओर से उसे अपना पक्ष रखने और जांच में शामिल होने के लिए कई बार आधिकारिक नोटिस तामील कराए गए, परंतु उसने प्रशासनिक आदेशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद पुलिस की विशेष टीमों ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन जब सफलता हाथ नहीं लगी तो पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया। अंततः पुलिस विभाग ने न्यायालय की शरण लेकर पुलिस एक्ट की धारा 37 के तहत आरोपी के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिया है।

    27 साल की नौकरी का दागदार अंत, पूर्व विधायक के गनमैन के रूप में भी रहा तैनात

    पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शंकरराम मूल रूप से नागौर जिले के बुटाटी गांव का रहने वाला है और करीब 27 वर्ष पूर्व वह राजस्थान पुलिस सेवा में भर्ती हुआ था। अपनी नौकरी का एक लंबा हिस्सा उसने बारां जिले में ही व्यतीत किया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह वर्ष 2003 के बाद विभिन्न कार्यकालों के दौरान छबड़ा क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रताप सिंह सिंघवी की सुरक्षा में लंबे समय तक बतौर गनमैन (अंगरक्षक) भी तैनात रहा था। पुलिस कप्तान ने अपनी बर्खास्तगी रिपोर्ट में सख्त लहजे में लिखा है कि आरोपी ने रक्षक के बजाय भक्षक की भूमिका निभाकर पुलिस की साख को बट्टा लगाया है, इसलिए ऐसे दागी कर्मचारी को सेवा में रखना कतई उचित नहीं है। फिलहाल पुलिस उसकी धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

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