नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय संगठन में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को देश के कई राज्यों में संगठनात्मक बदलावों का ऐलान किया। इस घोषणा में सबसे ज्यादा ध्यान देश की राजधानी दिल्ली पर गया, जहां केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। हर्ष मल्होत्रा को वीरेंद्र सचदेवा की जगह यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वर्तमान में वे केंद्र सरकार में कॉरपोरेट कार्य, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं, जिसके बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर राजनीतिक कयास तेज हो गए हैं।
बीजेपी का 'एक व्यक्ति, एक पद' का सिद्धांत और अपवाद
पूर्वी दिल्ली से लोकसभा सांसद हर्ष मल्होत्रा की इस नई नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्हें जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल (कौंसिल ऑफ मिनिस्टर्स) से इस्तीफा देना होगा। दरअसल, बीजेपी के संविधान में लंबे समय से 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत का पालन किया जाता रहा है। अतीत में राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे बड़े दिग्गजों ने भी सरकार और संगठन में एक साथ दो पदों को नहीं संभाला था। हालांकि, इस नियम के कुछ अपवाद भी रहे हैं, जैसे उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी, जो वर्तमान में संगठन की कमान संभालने के साथ-साथ केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री के पद पर भी बने हुए हैं।
कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट और सहयोगियों को तरजीह
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि हर्ष मल्होत्रा का दिल्ली अध्यक्ष बनना केवल एक सांगठनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह आगामी केंद्रीय कैबिनेट विस्तार की पृष्ठभूमि हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाकर कई अहम मंत्रालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की थी। इसके अलावा, जून के दूसरे हफ्ते में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि सरकार अपने उन सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व देने की तैयारी कर रही है जो अभी बाहर हैं, जैसे कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)।
2027 के विधानसभा चुनावों को साधने की रणनीति
बीजेपी की यह नई जमावट आने वाले राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखकर भी की जा रही है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश सहित देश के 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी इन राज्यों में सामाजिक (जातीय) और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए एक बिल्कुल नई टीम तैयार करना चाहती है। इसके साथ ही, जून महीने में राज्यसभा की 24 खाली सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की भी कई सीटें शामिल हैं। ऐसे में कयास हैं कि इन चुनावों के जरिए कुछ ऐसे चेहरों को संसद भेजा जा सकता है, जिन्हें भविष्य में सरकार या कैबिनेट का हिस्सा बनाया जाना तय हुआ है।


