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    महाराष्ट्र ST में आएगा बड़ा बदलाव, 2037 तक दौड़ेंगी सिर्फ इलेक्ट्रिक बसें

    मुंबई। महाराष्ट्र की लाइफलाइन कही जाने वाली और गांव-गांव से लेकर शहरों तक दौड़ने वाली एसटी निगम की मशहूर 'लालपरी' अब जल्द ही आधुनिक रूप में नजर आएगी। पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) ने वर्ष 2037 तक अपने पूरे बस बेड़े को इलेक्ट्रिक बसों में तब्दील करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। एसटी मुख्यालय में आयोजित निगम की 312वीं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक के बाद परिवहन मंत्री एवं एसटी निगम के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने इस महत्वाकांक्षी योजना की आधिकारिक जानकारी साझा की है। वर्तमान में निगम के बेड़े में कुल 14 हजार बसें हैं, जिनमें से करीब 1,100 बसें पहले ही इलेक्ट्रिक बेड़े का हिस्सा बन चुकी हैं।

    बेड़े में शामिल होंगी आखिरी 5 हजार डीजल बसें

    भविष्य की रणनीतियों के तहत निगम द्वारा लगभग 5 हजार नई डीजल बसें खरीदी जाएंगी। परिवहन मंत्री के स्पष्टीकरण के अनुसार, यह अंतिम मौका होगा जब एसटी बेड़े में डीजल बसों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद भविष्य की सभी नई खरीद में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बसों को ही प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

    पुराने वाहनों का होगा ‘इलेक्ट्रिक कायाकल्प’

    एसटी निगम केवल नई ई-बसें खरीदने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसने पुरानी गाड़ियों के पुनर्चक्रण और आधुनिकीकरण की भी अनूठी योजना बनाई है। इसके तहत वर्ष 2027 से लगभग 7 से 8 साल पुरानी डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक किट के माध्यम से ई-बसों में परिवर्तित (इलेक्ट्रिक रेट्रोफिटमेंट) किया जाएगा। इस कदम से पुराने वाहनों का सदुपयोग होने के साथ-साथ ईंधन पर होने वाले भारी-भरकम खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

    हर डिपो में विकसित होगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

    बसों के इस बड़े बदलाव को सुचारू रूप से चलाने के लिए चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी है। इसके लिए राज्य के सभी डिपो में चरणबद्ध तरीके से हाई-पावर चार्जिंग स्टेशन, मजबूत बिजली आपूर्ति और तकनीकी रखरखाव की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। चार्जिंग व्यवस्था और बसों की आपूर्ति को तालमेल के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

    वर्ष 2037 तक का यह लक्ष्य पूरा होने पर महाराष्ट्र की सड़कों पर पारंपरिक डीजल आधारित 'लालपरी' की जगह पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल 'ई-लालपरी' दौड़ती हुई दिखाई देगी, जो प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

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