भीलवाड़ा। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने देश के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम के तहत चौथे राउंड (राउंड-4) का आवेदन पोर्टल 1 नवंबर से फिर से खोल दिया है। केंद्र सरकार ने एमएसएमई और मध्यम स्तर की टेक्सटाइल इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश और टर्नओवर की अनिवार्य सीमाओं में भारी कटौती की है। इस योजना की अवधि को बढ़ाकर वर्ष 2033-34 तक के लिए विस्तारित कर दिया गया है।
वेबिनार में दी गई नए संशोधनों की जानकारी
योजना के नए नियमों को लेकर वस्त्र मंत्रालय की ओर से देश के प्रमुख औद्योगिक संगठनों के साथ एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें संयुक्त सचिव मनीषा चटर्जी ने संशोधित प्रारूप की विस्तृत जानकारी दी। इस वेबिनार में राजस्थान का प्रतिनिधित्व एकमात्र औद्योगिक संगठन 'मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' ने किया। योजना के तहत इंक्रीमेंटल टर्नओवर पर पहले वर्ष 11 प्रतिशत इंसेंटिव मिलेगा, जो प्रतिवर्ष एक-एक प्रतिशत घटकर पांचवें वर्ष 7 प्रतिशत रह जाएगा। पूर्व के फेजों में आवेदन करने वाली इकाइयों को नए फेज में माइग्रेट होने की सुविधा भी दी जाएगी।
न्यूनतम निवेश और टर्नओवर की सीमा में बड़ी कटौती
नए प्रावधानों के तहत अब न्यूनतम निवेश की सीमा घटाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि न्यूनतम टर्नओवर की अनिवार्यता को 200 करोड़ रुपये से घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। टेक्सटाइल उद्योग की मांग पर मैनमेड फाइबर (MMF) और टेक्निकल टेक्सटाइल के 28 नए एचएसएन (HSN) कोड शामिल किए जा रहे हैं, जिनकी गजट अधिसूचना जल्द जारी होने की संभावना है।
राजस्थान के टेक्सटाइल हब और एमएसएमई को मिलेगा फायदा
शर्तों में दी गई इस ढील से राजस्थान के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों—विशेष रूप से भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली और बालोतरा की इकाइयों को बड़ा संबल मिलने की उम्मीद है। मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव आरके जैन के अनुसार, न्यूनतम निवेश और टर्नओवर की सीमाएं घटाने तथा नए एचएसएन कोड जोड़ने से प्रदेश के एमएसएमई (MSME) सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे राज्य में नए निवेश और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।


