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    जनसंख्या में बड़ा बदलाव, बुजुर्गों की संख्या बढ़ी; जन्म दर में गिरावट जारी

    चंडीगढ़। पंजाब के जनसांख्यिकीय ढांचे (डेमोग्राफिक स्ट्रक्चर) में बहुत तेजी से परिवर्तन देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में नवजात बच्चों और नौजवानों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है, जबकि इसके विपरीत वृद्धों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 0 से 14 वर्ष के बच्चों की हिस्सेदारी कुल आबादी में महज 19.2 प्रतिशत रह गई है, जो कि 24 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। तुलनात्मक रूप से देखें तो पड़ोसी राज्य हरियाणा में यह आंकड़ा 24.4 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में 20.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसी प्रकार, 0 से 4 वर्ष के शिशुओं की आबादी भी पंजाब में सिर्फ छह प्रतिशत है, जबकि देश का औसत 7.9 प्रतिशत है।

    कामकाजी आबादी मजबूत लेकिन बुजुर्गों की हिस्सेदारी बढ़ी

    सांख्यिकीय विश्लेषण से पता चलता है कि पंजाब में वर्तमान समय में कामकाजी उम्र (15 से 59 वर्ष) के लोगों की तादाद 69.3 फीसदी है, जो कि 66.4 फीसदी के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है। हालांकि, चिंताजनक पहलू यह है कि राज्य में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों की आबादी का ग्राफ बढ़कर 11.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो देश के औसत (9.7 प्रतिशत) से कहीं ज्यादा है। भौगोलिक दृष्टिकोण से ग्रामीण अंचलों में बुजुर्गों की यह हिस्सेदारी 12.2 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 10.7 प्रतिशत के स्तर पर है।

    घटती जन्म दर और बदलती सामाजिक प्राथमिकताएं

    आबादी के इस असंतुलन और बच्चों की संख्या कम होने के पीछे मुख्य वजह राज्य की जन्म दर में दर्ज की जा रही निरंतर गिरावट है। आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2012-14 के समय पंजाब की जन्म दर जहां 15.7 के स्तर पर थी, वहीं वह वर्ष 2022-24 के दौर में और सिमटकर 13.9 पर आ गई है, जो कि 18.6 के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। इसकी तुलना में हरियाणा में जन्म दर 18.8 और हिमाचल प्रदेश में 14.2 है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण अब लोग एक या दो बच्चों तक ही सीमित रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा (जीने की उम्र) में बढ़ोतरी हो रही है।

    विदेश पलायन से भविष्य में कार्यबल के संकट की आशंका

    जनसंख्या के इन बदलते समीकरणों के बीच युवाओं का बड़े पैमाने पर होने वाला देश-त्याग राज्य के भविष्य के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, पंजाब से प्रतिवर्ष करीब डेढ़ से दो लाख प्रतिभावान नौजवान उच्च शिक्षा और रोजगार की तलाश में विदेशों का रुख कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश स्थायी रूप से वहीं बस जाते हैं। समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों ने सचेत किया है कि इस तरह युवाओं के बाहर जाने और बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से आने वाले समय में राज्य के भीतर कुशल और उत्पादक कार्यबल (वर्कफोर्स) का बड़ा संकट पैदा हो सकता है, साथ ही वृद्ध आबादी की बढ़ी तादाद के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

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