मुंबई। मुंबई के सायन इलाके में स्थित बेस्ट (BEST) के अनिक बस डिपो में सोमवार शाम को एक दर्दनाक और भीषण हादसा हुआ। डिपो परिसर में अचानक भयंकर आग भड़क उठी, जिससे वहां खड़ी कई गाड़ियां चपेट में आ गईं। इस वीभत्स दुर्घटना में कुल 10 सीएनजी बसें पूरी तरह से जलकर खाक हो गईं, जबकि दो अन्य बसें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है।
निजी ठेकेदार की थीं जली हुई बसें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग की चपेट में आने वाली ये सभी बसें निजी ठेकेदार द्वारा संचालित वेट-लीज मिडी सीएनजी बसें थीं। इनमें से नौ बसें बिल्कुल नई थीं, जिन्हें हाल ही में शामिल किया गया था, जबकि तीन अन्य बसें पहले से ही परिचालन में थीं। घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आपातकालीन सेवाएं तुरंत हरकत में आ गईं। आग से उठा घना काला धुआं पूर्वी उपनगरों के दूर-दूर तक के आसमान में छाया रहा, जिसे देखकर आसपास के लोगों और वाहन चालकों में भारी दहशत फैल गई।
गैस पाइप पिघलने से विकराल हुई आग
घटना की जांच में जुटे बेस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आग लगने के स्पष्ट कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है। हालांकि, शुरुआती अनुमान के मुताबिक, संभवतः किसी बाहरी स्रोत से उठी चिंगारी के कारण पास रखे ज्वलनशील पदार्थ ने आग पकड़ ली। इसके बाद भीषण गर्मी के कारण बसों के गैस पाइप पिघल गए, जिससे गैस का तेजी से रिसाव होने लगा और आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया।
पार्किंग और सुरक्षा उपायों पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं। बेस्ट समिति के सदस्य रमाकांत गुप्ता ने डिपो में बसों को बहुत पास-पास पार्क किए जाने और कर्मचारियों की सुस्त प्रतिक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना था कि यदि शुरुआती दौर में ही रेत की बाल्टियों और अग्निशामक यंत्रों का उपयोग कर लिया जाता या ड्राइवर सूझबूझ दिखाते हुए बसों को हटा लेते, तो नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। इसके विपरीत, अधिकारियों का पक्ष है कि आग और धुएं का दायरा इतना व्यापक था कि किसी भी कर्मचारी के लिए पास जाना या वाहनों को निकालना मुमकिन नहीं था।
बेड़े की कमी के बीच सुरक्षा पर जोर
पूर्व अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र चौधरी का मानना है कि सीएनजी गैस में लगी आग को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इस बीच, अन्य समिति सदस्यों ने शहर के सभी 27 बस डिपो में आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू करने और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की जोरदार मांग की है। आपको बता दें कि यह पिछले कुछ महीनों में बेस्ट बसों से जुड़ी आग लगने की आठवीं घटना है, जिससे पहले से ही घटे हुए करीब 2,800 बसों के बेड़े पर और अधिक संकट गहरा गया है।


