पालघर। मुंबई से सटे पालघर के एक निजी अस्पताल (रिलीफ अस्पताल) में हुई तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में फरार चल रहे सभी नौ आरोपियों ने रविवार को पालघर पुलिस थाने में खुद पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया। इस ताजा कार्रवाई के साथ ही इस सनसनीखेज मामले में कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 5 सितंबर को घायल गोविंदाओं (दही हांडी उत्सव के दौरान घायल हुए कलाकारों) के इलाज को लेकर शुरू हुआ था। आरोप है कि इलाज से जुड़े विवाद के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने रिलीफ अस्पताल के अंदर घुसकर न केवल अस्पताल के कर्मचारियों के साथ जमकर मारपीट की, बल्कि वहां तोड़फोड़ भी की थी। इस गंभीर घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी।
नौ प्रमुख आरोपियों का सरेंडर
शनिवार तक पुलिस इस मामले में 14 आरोपियों को दबोच चुकी थी। इसके बाद रविवार सुबह अचानक फरार चल रहे नौ अन्य आरोपियों ने खुद पालघर पुलिस स्टेशन पहुंचकर सरेंडर कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं:
निलंबित जिला प्रमुख कुंदन सांखे
युवा सेना प्रमुख सैराज पाटील
मनीष उर्फ विक्की सांखे
राहुल सांखे, ऋषभ वारे
नगरसेविका नीलम सांखे
मनोज घरात और एक अन्य वाहन चालक
इन सभी के थाने पहुंचते ही पुलिस ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए सभी नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट में पेशी और पुलिस हिरासत
रविवार शाम करीब 7 बजे पुलिस ने पहले गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों और इन नए 9 आरोपियों—कुल 22 आरोपियों को पालघर हॉलिडे सेशंस कोर्ट में पेश किया। अदालत में इस मामले की सुनवाई देर रात तक चली, जिसके बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
अब पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है ताकि अस्पताल में हुए हमले की असली वजह, हर आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका और इस पूरी हिंसा से जुड़ी परिस्थितियों का पूरी तरह से खुलासा किया जा सके। सभी मुख्य आरोपियों के शिकंजे में आने के बाद अब पुलिस ने जांच की गति को और तेज कर दिया है।


