नई दिल्ली। भारतीय रेलवे देशवासियों के रेल सफर के अनुभव को पूरी तरह आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा सुविधाएं और तीव्र गति प्रदान करने के उद्देश्य से चालू वित्तीय वर्ष के दौरान भारी-भरकम राशि खर्च कर दर्जनों नई सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे रेल नेटवर्क में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
तेजी से जारी है वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण
देश की तीन प्रमुख प्रतिष्ठित कोच निर्माण इकाइयों में इन आधुनिक ट्रेनों का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में विभिन्न मार्गों पर चेयरकार और स्लीपर संस्करणों को मिलाकर एक सौ से अधिक वंदे भारत ट्रेनें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, लेकिन यह चालू वित्त वर्ष उत्पादन के मामले में एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार इस अवधि के दौरान सत्ताईस नए ट्रेन सेट का उत्पादन पूरा कर लिया जाएगा, जिनकी कुल संख्या आगे चलकर यात्री मांग के आधार पर बढ़ाई भी जा सकती है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री और कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री में इन रेकों को तैयार करने का काम पूरी गति से चल रहा है।
भविष्य के लिए एक हजार ट्रेनों का मेगा प्रोजेक्ट
भारतीय रेलवे ने लंबी अवधि की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए देश भर में कुल एक हजार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पटरियों पर उतारने का महा-प्लान तैयार किया है। इस वृहद परियोजना के तहत विभिन्न कोच विन्यास वाली चेयरकार और स्लीपर ट्रेनें शामिल होंगी, जिन्हें देश के अलग-अलग रेल मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से उतारा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए रेलवे द्वारा एक भारी-भरकम बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है, जिससे देश के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूती मिलेगी।
देश की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन की तैयारी
वंदे भारत की सफलता के बाद रेलवे अब इससे भी आगे की तकनीकी छलांग लगाने की तैयारी में जुट गया है। चेन्नई स्थित आईसीएफ और बीईएमएल के संयुक्त सहयोग से लगभग दो सौ अस्सी किलोमीटर प्रति घंटे की अत्यधिक रफ्तार से दौड़ने वाली पूरी तरह स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन का निर्माण किया जा रहा है। इस आधुनिक ट्रेन को देश में विकसित किए जा रहे हाई-स्पीड ट्रैक पर संचालित किए जाने की योजना है, जिससे भारत रेल निर्माण और आधुनिक परिवहन तकनीक के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकेगा।


