भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक रिटायर्ड महिला जज की बहू और पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ी प्रशासनिक अनदेखी उजागर हुई है। 16 मई को फंदे से लटके मिले ट्विशा के शव का पहला पोस्टमार्टम बिना 'लिगेचर मटेरियल' (फांसी के फंदे) के ही कर दिया गया, जो कि कानूनन और चिकित्सीय रूप से अनिवार्य माना जाता है। इस बड़ी चूक के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है, जिसके चलते अब प्रशासन ने निर्णय लिया है कि शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने अपनी इस गंभीर त्रुटि को स्वीकार करते हुए अब उस फंदे को भोपाल एम्स के फॉरेंसिक विभाग को सौंप दिया है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक मिलान किया जा सके।
क्या होता है लिगेचर मटेरियल और क्यों अटकी अंतिम रिपोर्ट
फोरेंसिक विज्ञान और कानून के मुताबिक, जब भी कोई संदिग्ध व्यक्ति फांसी लगाकर आत्महत्या करता है, तो जांच अधिकारी का यह प्राथमिक कर्तव्य होता है कि वह शव के साथ वह लिगेचर मटेरियल (यानी साड़ी, दुपट्टा या रस्सी जिससे फंदा बना हो) भी डॉक्टरों को सौंपे। इसके जरिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ मृतक के गले पर उभरे गहरे निशानों (लिगेचर मार्क) का फंदे की बनावट और मोटाई से सटीक मिलान करते हैं। इसी मिलान से यह स्पष्ट होता है कि यह वाकई आत्महत्या है या फिर हत्या करके शव को फंदे पर लटकाया गया है। पुलिस का इस लापरवाही पर कहना है कि किसी कारणवश इसे पहले नहीं भेजा जा सका था, हालांकि उनका दावा है कि कभी-कभी बिना इसके भी शुरुआती पोस्टमार्टम कर दिया जाता है।
इंसाफ के लिए मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुंचे परिजन, केस यूपी ट्रांसफर करने की मांग
ट्विशा की संदिग्ध मौत के बाद से ही उनके मायके पक्ष का रो-रोकर बुरा हाल है और पिछले छह दिनों से मृतका का शव भोपाल एम्स के शवगृह (मर्चुरी) में रखा हुआ है। न्याय की आस में परिजनों ने तब तक शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है, जब तक मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं हो जाती। रविवार को इस मामले को लेकर ट्विशा के पिता और परिवार के सदस्यों ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। परिजनों की मांग है कि चूंकि ससुराल पक्ष का भोपाल की न्यायिक व्यवस्था में सीधा प्रभाव है, इसलिए इस पूरे मामले को मध्य प्रदेश से बाहर उत्तर प्रदेश ट्रांसफर किया जाए। मुख्यमंत्री ने इस बेहद संवेदनशील मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवार को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का भरोसा दिलाया है।
पूर्व जज की बहू की मौत का मामला, आरोपी पति की जमानत पर आज सुनवाई
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा का शव उनके भोपाल स्थित आवास में संदिग्ध हालत में मिला था। पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में भले ही मौत की वजह सुसाइड बताई गई हो, लेकिन ट्विशा के मायके वालों का आरोप है कि उसे दहेज के लिए लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पूर्व जज को उनकी ढलती उम्र के आधार पर अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि ट्विशा के पति समर्थ सिंह की जमानत याचिका पर सोमवार यानी आज कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। परिजनों का आरोप है कि आरोपी पक्ष के रसूख के कारण स्थानीय पुलिस सही से कार्रवाई नहीं कर रही है, जिसके कारण वे लगातार इस केस को राज्य से बाहर भेजने की गुहार लगा रहे हैं।


