रद्दी नष्ट की गई या सबूत मिटाए गए? कार्यालय परिसर में कागज जलाने की अनुमति किसने दी, नए ठेकों के बीच रिकॉर्ड जलने से संदेह गहराया
भोपाल। मध्यप्रदेश आबकारी विभाग के राज्य उड़नदस्ता कार्यालय में पिछले तीन दिनों से बड़ी मात्रा में कागज जलाए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान लाखों की संख्या में दस्तावेजों को आग के हवाले कर दिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ये केवल रद्दी कागज थे या फिर किसी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और संभावित सबूत को मिटाने की कोशिश की गई है।
कागज जलाने की अनुमति स्वयं नेमा ने दी थी क्या
कार्यालय परिसर के अंदर इस तरह खुलेआम कागज जलाने की अनुमति किसने दी, इसे लेकर विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कार्यालय के मुखिया मुकेश नेमा के नेतृत्व में यह पूरा कार्यालय संचालित होता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कागज जलाने की अनुमति स्वयं नेमा ने दी थी या फिर कर्मचारियों ने अपने स्तर पर यह कार्रवाई कर डाली। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब जानकारी लेने पहुंचे एक आबकारी विशेषज्ञ ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से पूछा कि कागज जलाने की अनुमति किसने दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वहीं मौजूद एक अधिकारी ने वीडियो न बनाने की बात कही। इसी दौरान एक कर्मचारी ने कथित रूप से स्वीकार किया कि “वेयरहाउस लेखा साहब के कहने पर दो दिनों से कागज जला रहा हूं, एक ट्रक भरकर कागज पहले ही जला चुका हूं।”

आखिर वह कौन से दस्तावेज थे जिन्हें भारी मात्रा में जलाया गया?
यह बयान कई नए सवाल खड़े करता है। आखिर वह कौन से दस्तावेज थे जिन्हें ट्रक भरकर जलाया गया? क्या यह नियमित रिकॉर्ड नष्ट करने की प्रक्रिया थी या फिर विभागीय फाइलों और वित्तीय दस्तावेजों को खत्म किया गया? खास बात यह है कि इसी समय प्रदेश में नए शराब ठेकों की प्रक्रिया भी चल रही है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है। सूत्रों का कहना है कि विभाग में मुकेश नेमा के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। यदि बीते एक वर्ष के रिकॉर्ड, डीजल खर्च, विभागीय गाड़ियों के उपयोग और अधिकारियों के दौरों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। कागजों पर दर्ज दौरे, वाहनों का उपयोग और ईंधन खर्च भी अब जांच के दायरे में आने चाहिए
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि राज्य उड़नदस्ता कार्यालय में जले कागज आखिर रद्दी थे या फिर सबूत
विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि इस पूरे मामले की शिकायत जल्द ही ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह मामला केवल कागज जलाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और ठेका प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि राज्य उड़नदस्ता कार्यालय में जले कागज आखिर रद्दी थे या फिर ऐसे दस्तावेज, जिनके सामने आने से कई राज खुल सकते थे।


