वाशिंगटन। वैश्विक स्तर पर अपनी राजनयिक उपस्थिति को सीमित करने और खर्चों में कटौती के उद्देश्य से अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाने की योजना बनाई है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने कांग्रेस की समितियों को जानकारी दी है कि वह पांच देशों में अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को बंद करने की तैयारी में है।
किसी तात्कालिक वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति के बिना एक साथ कई विदेशी मिशनों को समेटने का यह फैसला अमेरिकी कूटनीति के इतिहास में एक दुर्लभ मामला माना जा रहा है।
इन पांच स्थानों पर ताला लगाने की तैयारी
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा संसद को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित केंद्रों पर राजनयिक गतिविधियों को रोकने का प्रस्ताव है:
सेंट जॉर्ज (ग्रेनाडा): मुख्य दूतावास
नागोया (जापान): वाणिज्य दूतावास (Consulate)
मेडान (इंडोनेशिया): वाणिज्य दूतावास
विनिपेग (कनाडा): वाणिज्य दूतावास
डौआला (कैमरून): दूतावास का शाखा कार्यालय (Branch Office)
बताया जा रहा है कि यह कदम पिछले वर्ष डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू हुई आंतरिक चर्चाओं और समीक्षाओं का परिणाम है।
फैसले का मुख्य कारण: बजटीय कटौती और कार्यकुशलता
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन मिशनों को बंद करने का सबसे बड़ा कारण सरकारी फिजूलखर्ची पर रोक लगाना और विदेश नीति के ढांचे को आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक बनाना है। विदेश विभाग और बजटीय अधिकारियों का मानना है कि छोटे आकार के दूतावास और वाणिज्य दूतावास वर्तमान डिजिटल दौर में उतने प्रभावी नहीं रहे हैं, जबकि इनके रखरखाव पर हर साल भारी भरकम बजट खर्च होता है।
अमरीकी राजनीति में विरोध: 'चीन और रूस को मिलेगा फायदा'
प्रशासन के इस कदम को लेकर अमेरिका के भीतर ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है:
विपक्ष और पूर्व राजनयिकों की चिंता: डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और कई पूर्व अमेरिकी कूटनीतिज्ञों ने इस योजना पर तीखी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि दुनिया भर में अमेरिकी उपस्थिति घटाने से वैश्विक स्तर पर वाशिंगटन का राजनीतिक दबदबा कम होगा।
प्रतिस्पर्धियों की बढ़त: आलोचकों का तर्क है कि जिन क्षेत्रों से अमेरिका पीछे हट रहा है, वहां चीन और रूस जैसे प्रतिस्पर्धी देश आसानी से अपना प्रभाव और पैठ बढ़ा लेंगे।
विदेश विभाग का रुख
हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने बंद किए जाने वाले मिशनों की सूची पर अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन उसने यह स्पष्ट किया है कि विदेशों में अमेरिकी राजनयिक उपस्थिति को किफायती, सुव्यवस्थित और परिणामदायक बनाना सरकार की प्राथमिकता है और इस संदर्भ में कांग्रेस को सूचित करने के सभी कानूनी नियमों का पालन किया जा रहा है।


