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    ‘एक रोटी गाय के नाम’ का संदेश लेकर पन्ना में निकली विशाल बाइक रैली

    पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में इन दिनों आस्था और सामाजिक सरोकार का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। पूज्य रावतपुरा सरकार के पावन सानिध्य में एक विशाल जनजागरण अभियान का आगाज किया गया है, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु गौसेवा है। धार्मिक महोत्सव के इस विशेष अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और युवा इस मुहिम का हिस्सा बनने पहुंचे। अभियान की शुरुआत सर्किट हाउस से एक भव्य बाइक रैली के रूप में हुई, जो शहर के विभिन्न चौराहों और मुख्य मार्गों से गुजरती हुई महेंद्र भवन पर संपन्न हुई। इस दौरान पूरा मार्ग जयकारों और भगवा ध्वजों से गुंजायमान रहा, और लोगों में भारी उत्साह देखा गया।

    यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य नागरिकों को गौसेवा और उनके सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करना भी था। शहर के आम नागरिकों, समाजसेवियों और युवाओं की सक्रिय उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को एक बड़े जन-आंदोलन में बदल दिया।

    घर-घर जाकर जगाई सेवा की अलख

    बाइक रैली के समापन के बाद पूज्य रावतपुरा सरकार और पन्ना के विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से ‘एक रोटी गाय के नाम’ मुहिम की शुरुआत की। दोनों दिग्गजों ने धाम मोहल्ला क्षेत्र में खुद घर-घर का दौरा किया और स्थानीय लोगों से संवाद कर उनसे यह अपील की कि वे अपने घर में बनने वाली पहली रोटी गौमाता के लिए जरूर निकालें।

    आयोजकों का मानना है कि इस प्रयास से लोगों की दिनचर्या में सेवा और संवेदनशीलता की भावना को एक नया विस्तार मिलेगा। भारतीय संस्कृति में रसोई की पहली रोटी गाय को खिलाने की परंपरा सदियों पुरानी है, और इस अभियान का मकसद इसी गौरवशाली परंपरा को आधुनिक समाज में व्यापक स्तर पर पुनर्जीवित करना है।

    बदलाव की नींव है यह मुहिम: बृजेंद्र प्रताप सिंह

    इस मौके पर पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ‘एक रोटी गाय के नाम’ कोई साधारण या औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज के भीतर सेवा भाव, आपसी सहयोग और मजबूत संस्कारों को सींचने की एक गंभीर कोशिश है। उनका मानना है कि जब समाज का हर व्यक्ति अपनी छोटी-छोटी जिम्मेदारियों को समझने लगता है, तभी एक बड़े और सकारात्मक बदलाव की नींव पड़ती है।

    धार्मिक और सामाजिक मामलों के जानकारों का भी कहना है कि इस तरह के अभियान समाज में तभी गहरा असर छोड़ते हैं, जब जनता इसमें अपनी मर्जी से आगे बढ़कर हिस्सा लेती है। पन्ना के इस पूरे आयोजन में जिस तरह युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई, उसने यह साफ कर दिया है कि नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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