पटना। बिहार में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। राज्य में इस वर्ष दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार बिहार में अब प्रतिदिन करीब 26 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 22 लाख लीटर प्रतिदिन था। इस तरह एक साल के भीतर दूध उत्पादन में करीब 4 लाख लीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे हरे चारे की बेहतर उपलब्धता, अनुकूल मौसम और दुधारु पशुओं में बड़ी संक्रामक बीमारियों का नहीं फैलना प्रमुख कारण हैं। सामान्य तौर पर गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन में गिरावट देखी जाती है, लेकिन इस बार समय-समय पर हुई बारिश और अपेक्षाकृत बेहतर मौसम ने पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डाला। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष गायों और भैंसों में कोई बड़ी संक्रामक बीमारी नहीं फैली, जिससे पशुपालकों को नुकसान नहीं हुआ और दूध उत्पादन लगातार बना रहा। बेहतर पशु स्वास्थ्य के कारण डेयरी क्षेत्र को भी मजबूती मिली है। हालांकि, राज्य में पशुधन की संख्या में कुछ कमी दर्ज की गई है। 20वीं पशुधन गणना 2019 के अनुसार बिहार में लगभग 1 करोड़ 53 लाख गाय और 77 लाख भैंस थीं। वहीं, मार्च 2025 के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक गायों की संख्या घटकर करीब 1 करोड़ 48 लाख रह गई है। भैंसों की संख्या में भी कमी देखी गई है। इसके अलावा राज्य में पोल्ट्री पक्षियों की संख्या 2.25 करोड़ से अधिक बताई जा रही है, हालांकि वर्ष 2025 की पशुधन गणना की अंतिम रिपोर्ट अभी जारी नहीं की गई है। विभाग का मानना है कि पशुपालकों द्वारा अपनाए जा रहे बेहतर पशु प्रबंधन, संतुलित आहार और हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता ने दूध उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इससे न केवल डेयरी उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य के लाखों पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशुपालन और डेयरी विकास की योजनाओं को इसी तरह प्रभावी ढंग से लागू किया जाता रहा, तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
बिहार में दूध उत्पादन ने बनाई नई ऊंचाई, एक साल में 4 लाख लीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी


