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    Homeराज्यमध्यप्रदेशविधायकों की बाड़ेबंदी, कांग्रेस राज्यसभा चुनाव से पहले सक्रिय

    विधायकों की बाड़ेबंदी, कांग्रेस राज्यसभा चुनाव से पहले सक्रिय

    भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा पूरी तरह गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तीसरी सीट पर अचानक अपना उम्मीदवार मैदान में उतार देने के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस अप्रत्याशित कदम के बाद कांग्रेस खेमे में भारी खलबली मच गई है और पार्टी अब अपने विधायकों को टूटने से बचाने तथा उन्हें एकजुट रखने के लिए 'बाड़ेबंदी' यानी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की रणनीति बनाने में जुट गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के डर से कांग्रेस अपने सभी विधायकों को मध्य प्रदेश से बाहर किसी अन्य सुरक्षित राज्य में शिफ्ट करने की बड़ी योजना पर बेहद रणनीतिक तरीके से काम कर रही है।

    आरिफ मसूद दिल्ली रवाना, तेलंगाना भेजे जाने की सुगबुगाहट

    इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कांग्रेस के कद्दावर विधायक आरिफ मसूद रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी के साथ अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि विधायकों के पूरे मैनेजमेंट और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए आरिफ मसूद को आलाकमान द्वारा कोई बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी तेज चर्चा है कि दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद उन्हें सीधे तेलंगाना भेजा जा सकता है, क्योंकि वहां कांग्रेस की सरकार है और पार्टी अपने मध्य प्रदेश के विधायकों को मतदान होने तक वहीं ठहराने की सुरक्षित तैयारी कर रही है।

    विधायकों की निगरानी के लिए दिल्ली से आएंगे विशेष ऑब्जर्वर

    भाजपा द्वारा तीसरे प्रत्याशी के रूप में महेश केवट के नाम का एलान किए जाने के बाद से ही कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह सतर्क और एक्शन मोड में आ गया है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार अपने सभी विधायकों से फोन पर सीधा संपर्क बनाए हुए हैं और सभी को फिलहाल भोपाल में ही मौजूद रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) भी मध्य प्रदेश के इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए है। विधायकों की वफादारी सुनिश्चित करने और किसी भी तरह की सेंधमारी को रोकने के लिए दिल्ली से जल्द ही विशेष ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) भोपाल भेजे जा सकते हैं, जो चुनाव संपन्न होने तक विधायकों की हर गतिविधि और संगठन की बैठकों की सीधी निगरानी करेंगे।

    जीतू पटवारी का भाजपा पर तीखा हमला और रणनीति

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा के इस कदम पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का यह फैसला सिर्फ एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के विधायकों को प्रलोभन देने और उन्हें प्रभावित करने की एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। पटवारी ने हालांकि पूरा भरोसा जताते हुए दावा किया कि कांग्रेस की आधिकारिक उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के पास पर्याप्त संख्या बल है और वे पूरी मजबूती के साथ इस चुनाव में जीत दर्ज करेंगी।

    बंद कमरों में बैठकों और मंथन का दौर जारी

    इस बीच, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (पीसीसी) से लेकर तमाम बड़े नेताओं के निवास स्थानों पर बंद कमरों में मैराथन बैठकों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार खुद कमान संभाले हुए हैं और हर एक विधायक से व्यक्तिगत तौर पर वन-टू-वन बातचीत कर उनका भरोसा टटोल रहे हैं। कांग्रेस की पूरी कोशिश यह है कि आगामी 18 जून को होने वाले मतदान के दिन तक सभी विधायकों को एक साथ एक ही घेरे में रखा जाए, ताकि विपक्षी खेमे को राजनीतिक उठापटक या क्रॉस वोटिंग कराने का जरा सा भी मौका न मिल सके।

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