नोहर विधायक अमित चाचान ने भाजपा सरकार को गरीब व मजदूर विरोधी बताया।
मिशनसच खैरथल। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के भाजपा सरकार के निर्णय को लेकर राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तीखी हलचल देखने को मिली। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा खैरथल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें नोहर से विधायक अमित चाचान ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल योजनाओं का नाम बदलकर अपनी उपलब्धियां गिनाने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि योजनाओं के लाभों में लगातार कटौती की जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधायक अमित चाचान ने कहा कि मनरेगा जैसी योजना देश के ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा रही है। इस योजना का मूल उद्देश्य गांवों में रहकर ही गरीब परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार इस योजना की मूल भावना को कमजोर कर रही है। नाम बदलने का फैसला केवल एक राजनीतिक दिखावा है, जबकि इसके पीछे असली मंशा योजनाओं की जवाबदेही से बचने की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बीते वर्षों में मनरेगा के बजट में कटौती कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित कर दिए हैं। इसका सीधा असर उन मजदूरों पर पड़ रहा है, जिनके लिए यह योजना 100 दिन की रोजगार गारंटी का भरोसा देती थी। अब स्थिति यह है कि मजदूरों को पूरे 100 दिन का काम नहीं मिल पा रहा, जिससे उनके परिवारों की आजीविका संकट में है।
अमित चाचान ने कहा कि सरकार चुनिंदा गांवों और क्षेत्रों को ही योजनाओं का लाभ देने की नीति अपना रही है। इससे बड़ी संख्या में गांव योजना के दायरे से बाहर हो रहे हैं और गरीब मजदूर वंचित रह जा रहे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक और आर्थिक अन्याय करार देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर मजदूरों के हक के साथ हो रहे खिलवाड़ को सहन नहीं करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मनरेगा के नाम परिवर्तन और लाभों में कटौती का निर्णय वापस नहीं लिया, तो पार्टी जनआंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक योजना के नाम की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीब परिवारों के अधिकारों की है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल प्रचार और नामकरण की राजनीति कर रही है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है और गरीबों को मिलने वाली सहायता घटाई जा रही है।
इस दौरान कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जनविरोधी फैसले वापस नहीं लेती है, तो सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष बलराम यादव, इमरान खान, कोटकासिम पूर्व प्रधान विनोद कुमारी सांगवान, जयप्रकाश हेडाऊ, यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पवन खटाना, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष अनीश खान, यूथ कांग्रेस के प्रदेश सचिव रामनिवास प्रजापत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता फतेह मोहम्मद,मेहरदिन खान, दयाराम चावड़ा, दौलत नगर सहित अनेक कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए मजदूर हितों की रक्षा का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना देश की आत्मा से जुड़ी है। इसका कमजोर होना सीधे-सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। इसलिए कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और गरीबों की आवाज को दबने नहीं देगी।
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