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    मुंबई स्कूल बस हादसा: पेड़ गिरने से बच्चे की मौत पर मेयर का ठेकेदारों पर आरोप

    मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले दिनों पेड़ गिरने के कारण एक 11 वर्षीय मासूम बच्चे की असामयिक और दर्दनाक मौत हो गई थी। इस बेहद संवेदनशील और दुखद हादसे को लेकर हाल ही में प्रशासन की तरफ से एक आधिकारिक जांच रिपोर्ट पेश की गई थी। हालांकि, इस रिपोर्ट के तथ्यों और निष्कर्षों से असंतुष्ट होकर मेयर रितु तावड़े ने एक बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाते हुए इस रिपोर्ट को सबके सामने फाड़ दिया, जिससे नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच का टकराव अब खुलकर सामने आ गया है।

    मेयर द्वारा जांच रिपोर्ट सिरे से खारिज

    मेयर रितु तावड़े ने प्रशासनिक रिपोर्ट को पूरी तरह से अपूर्ण और पक्षपातपूर्ण करार देते हुए आज शुक्रवार को उसे सिरे से खारिज कर दिया। मेयर ने साफ शब्दों में कहा कि इस रिपोर्ट में घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस पूरे दर्दनाक हादसे की नए सिरे से और गहनता से जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    सदन में रिपोर्ट की कॉपियां फाड़े जाने का हंगामा

    इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए मेयर तावड़े ने बताया कि बीते कल नगर निगम के सदन में इस मामले को लेकर जोरदार चर्चा हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में मौजूद सभी दलों के पार्षदों ने सर्वसम्मति से प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद जनप्रतिनिधियों के भारी आक्रोश के बीच रिपोर्ट की प्रतियों को फाड़कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया गया, जो यह दर्शाता है कि प्रशासनिक लीपापोती को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    जांच पैनल में शामिल होंगे जन प्रतिनिधि

    सदन की गरिमा और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मेयर ने प्रशासन के समक्ष एक बेहद महत्वपूर्ण और ठोस शर्त रखी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि इस हादसे की दोबारा जांच के लिए जो नया पैनल गठित किया जाएगा, उसमें नगर निगम के दो सक्रिय पार्षदों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। मेयर का मानना है कि जनप्रतिनिधियों की निगरानी में होने वाली जांच ही पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकती है ताकि पीड़ितों को सही मायने में न्याय मिल सके।

    प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग

    इस दुखद घटना ने शहर में मानसून के दौरान पेड़ों की छंटाई और उनके रखरखाव को लेकर नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेयर के इस कड़े रुख के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने का भारी दबाव बन गया है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि मासूम की मौत के जिम्मेदार दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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