उदयपुर। शहर के ऐतिहासिक मुखर्जी चौक क्षेत्र में स्थित सब्जी बाजार के मुख्य मार्ग पर सोमवार सुबह उस समय अचानक भारी हंगामा और तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब नगर निगम की अतिक्रमण निरोधी टीम पुलिस बल के साथ वहां लगी अस्थाई दुकानों को हटाने के लिए पहुंची। प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगते ही वहां मौजूद महिला फल और सब्जी विक्रेताओं ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं ने निगम के दस्तों के सामने खड़े होकर अपने अस्थाई ढांचों और ठेलों को वहां से हटाने से साफ तौर पर मना कर दिया, जिसके बाद स्थिति काफी संवेदनशील हो गई।
चार दशकों पुरानी आजीविका का हवाला, महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
कार्रवाई के दौरान नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों ने उग्र हो रही महिलाओं को शांत करने का प्रयास किया और उन्हें मुख्य सड़क खाली कर निर्धारित मंडी परिसर के अंदर अपनी दुकानें व्यवस्थित करने की सलाह दी। हालांकि, विरोध कर रही महिला दुकानदारों का तर्क था कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से इसी पारंपरिक स्थान पर बैठकर अपना व्यापार कर रही हैं और अचानक यहां से विस्थापित किए जाने से उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो जाएगी। महिलाओं ने रोष जताते हुए प्रशासन पर आरोप लगाया कि केवल पार्किंग की जगह बनाने के नाम पर लगभग 35 से अधिक गरीब परिवारों को उनके एकमात्र रोजगार से बेदखल करने की साजिश रची जा रही है।
राजनेताओं की एंट्री से बढ़ा सियासी पारा, भारी पुलिस बल तैनात
सड़क पर चल रहे इस भारी हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय राजनीति भी गरमा गई। कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ और पूर्व पार्षद नजमा मेवाफरोश तुरंत समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और पीड़ित महिलाओं के पक्ष में खड़े होकर नगर निगम की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। मौके पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और बढ़ते जनआक्रोश को भांपते हुए प्रशासनिक उच्चाधिकारियों ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के नेतृत्व में सूरजपोल और धानमंडी थानों से अतिरिक्त पुलिस जाब्ते को तत्काल प्रभाव से मौके पर बुलाकर तैनात कर दिया गया।
यातायात सुगमता के लिए कार्रवाई जरूरी, समझाइश का दौर जारी
इस भारी गहमा-गहमी के बीच नगर निगम के दस्ते ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए मुख्य मार्ग के किनारे रखे गए पत्थरों, कट्टों और अन्य अस्थाई सामानों को जब्त कर अपने ट्रैक्टरों में भरवाना शुरू कर दिया। मामले पर नगर निगम के आयुक्त अभिषेक खन्ना ने प्रशासनिक रुख स्पष्ट करते हुए बताया कि मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से लगने वाला यह अस्थाई बाजार लंबे समय से शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ था और इससे सुरक्षा से जुड़े कई खतरे भी पैदा हो रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी का रोजगार छीनना मकसद नहीं है, बल्कि सभी दुकानदारों को व्यवस्थित ढंग से मंडी के भीतर जगह दी जा रही है ताकि चौक का यातायात सुचारू हो सके। फिलहाल पुलिस के कड़े पहरे के बीच दोनों पक्षों में वार्ता का दौर चल रहा है।


