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    Homeराज्यमध्यप्रदेशमुख्यमंत्री के पास पहुंचा नौरादेही धोखाधड़ी मामला, गोपाल भार्गव ने लिखी चिट्ठी

    मुख्यमंत्री के पास पहुंचा नौरादेही धोखाधड़ी मामला, गोपाल भार्गव ने लिखी चिट्ठी

    सागर : रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व के विस्थापितों के साथ प्राइवेट बैंक द्वारा की गई धोखाधड़ी का मामला सीएम मोहन यादव तक पहुंच गया है. बैंक की रहली शाखा के कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर की गई धोखाधड़ी की शिकायत पीड़ितों ने पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक गोपाल भार्गव से की थी, जिसके बाद गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी है.

    गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री से राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की अध्यक्षता में एक वित्तीय विशेषज्ञों की समिति बनाकर धोखाधड़ी के इस मामले की जांच की मांग की है.

    गोपाल भार्गव की मुख्यमंत्री को चिठ्ठी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव द्वारा लिख गए पत्र में कहा गया है, '' मेरे विधानसभा क्षेत्र रहली का बड़ा हिस्सा वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आता है. इस हिस्से में एक दर्जन गांव की विस्थापन प्रक्रिया चल रही है, जिसमें विस्थापितों को मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए वन विभाग द्वारा उनके बैंक खाता एचडीएफसी बैंक की रहली शाखा में खुलवाए गए हैं. मेरे संज्ञान में आया है कि विस्थापितों के खाते में आई मुआवजा राशि के साथ एचडीएफसी बैंक द्वारा बड़े स्तर पर छल कपट पूर्वक धोखाधड़ी और गबन किया गया है.

    सीधे-साधे लोगों के साथ बैंक कर्मियों ने किया धोखा : भार्गव

    गोपाल भार्गव ने पत्र में आगे लिखा, '' विस्थापित लोग ज्यादातर जंगल में रहने वाले कम पढ़े लिखे और सीधे साधे हैं. इसलिए बैंक कर्मियों ने उनके सीधेपन का फायदा उठाकर उनके चेकों पर उनके दस्तखत और अंगूठे के निशान लेकर मनमानी राशि भरकर उन्हें थोड़ी बहुत राशि देकर चिल्लाकर भगा दिया. बैंक कर्मियों ने उनके अनपढ़ और कम पढ़े लिखे होने का फायदा उठाकर इनके खाते में जमा पैसे से बीमा पॉलिसी कर दी है. अब इन लोगों के पास आगे की किस्तों के लिए कोई पैसा नहीं है. इसलिए बीमा पॉलिसी में इनकी मुआवजा राशि डूब रही है.

    पीड़ित विस्थापितों का कहना है कि जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज की राशि जरूरत पड़ने पर डीएफओ से स्वीकृति लेकर खाते से निकालते हैं, जिसका हिसाब हम लोगों द्वारा मांगने पर बैंक द्वारा ना स्टेटमेंट दिया जा रहा है और ना ही पासबुक में एंट्री की जा रही है. जबकि विस्थापन के मुआवजे में मिलने वाली राशि के बारे में नियम है कि इसका उपयोग भूमि और संपत्ति क्रय करने में किया जा सकता है.

    वित्त विशेषज्ञों की कमेटी से जांच की मांग

    गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में लिखा, '' विस्थापितों के पास ज्यादातर एचडीएफसी बैंक के ही खाते हैं. इसलिए यह धोखाधड़ी और गबन बड़े स्तर पर होने की संभावना है. मेरे पास ग्राम खापा की कुछ विस्थापित लोग आवेदन लेकर आए हैं. एचडीएफसी बैंक के कर्मचारी कार्तिक, राहुल, नितिन और टाइगर रिजर्व की कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने व धोखाधड़ी से बचाने का अनुरोध किया है. इस मामले में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की अध्यक्षता में वित्त विशेषज्ञों की समिति गठित कर जांच करना चाहिए.''

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