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    Homeराज्यमध्यप्रदेशन स्टे, न राहत: सोम डिस्टिलरीज केस 23 मार्च को फिर टॉप...

    न स्टे, न राहत: सोम डिस्टिलरीज केस 23 मार्च को फिर टॉप प्राथमिकता पर सुना जाएगा

    राज्य की बहस अधूरी, कोर्ट ने दिखाई सख्ती; तकनीकी तर्कों बनाम तथ्यों की लड़ाई में केस फिलहाल सरकार की ओर झुका 

     भोपाल। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सोम डिस्टिलरीज से जुड़े महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई, जिसमें कोर्ट ने कोई अंतिम राहत  नहीं दी। न तो सस्पेंशन आदेश पर रोक  लगी और न ही आदेश को निरस्त किया गया। कोर्ट ने केवल दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, लेकिन राज्य सरकार की बहस पूरी नहीं हो सकी। इसके चलते मामले को 23 मार्च को “टॉप ऑफ द लिस्ट” में रखते हुए अगली सुनवाई तय की गई है।साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने इस मामले में त्वरित सुनवाई के संकेत भी दिए हैं।

    सोम डिस्टिलरीज की दलीलें

    पुराने नोटिस पर नई कार्रवाई गलत 2023–24 के शो-कॉज नोटिस के आधार पर 2024–25 और 2025–26 के नए लाइसेंस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती नया लाइसेंस = नई शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के केस का हवाला देते हुए कहा गया कि नया लाइसेंस पुराने विवादों से मुक्त होता है प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन एक ही नोटिस में दो अलग कंपनियों को शामिल किया गया, जिससे जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है ,गलत आधार पर कार्रवाई जिन व्यक्तियों का नाम नोटिस में है, वे आबकारी अधिनियम में दोषी  नहीं हैं

    राज्य सरकार की दलीले 

    सरकार ने सोम की दलीलों को खारिज करते हुए तथ्यों के आधार पर जवाब दिया ,दोषी व्यक्तियों की मौजूदगी
    राज्य सरकार ने कहा कि नोटिस में शामिल लोग आबकारी मामलों में दोषसिद्ध हैं

    कंपनी से सीधा संबंध मामले में 

    डायरेक्टर, सुपरवाइजर और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के जरिए कंपनी का सीधा जुड़ाव बताया गया याचिकाकर्ता को पहले रिवीजन प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी, सीधे हाई कोर्ट आना उचित नहीं “तथ्य और प्रक्रिया दोनों सरकार के पक्ष में हैं”तुरंत स्टे न मिलना यह संकेत देता है कि कोर्ट अभी पूरी तरह सोम के पक्ष में आश्वस्त नहीं है

    बहस का रुख बदला 

    मामला अब सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि तथ्यात्मक जांच की ओर बढ़ रहा है “टॉप ऑफ द लिस्ट” में रखने से स्पष्ट है कि कोर्ट इस केस को गम्भीरता से लेते हुए प्राथमिकता दे रहा है

    किसके लिए क्या दांव पर? 

    सोम डिस्टिलरीज के लिए खतरा अगर कोर्ट यह मान लेता है कि— कंपनी के कर्मचारी/डायरेक्टर अवैध गतिविधियों में शामिल थे फर्जी परमिट या अन्य आरोप सही हैं तो आबकारी अधिनियम की धारा 31 के तहत सस्पेंशन मजबूत हो जाएगा, भले ही तकनीकी खामियां हों

     सोम का मजबूत पक्ष 

    “नया लाइसेंस = पुराना नोटिस खत्म” यदि कोर्ट इस तर्क को स्वीकार करता है, तो पूरा मामला पलट सकता है

    23 मार्च को क्या होगा अहमसवाल कई है?

    अगली सुनवाई में कोर्ट इन प्रमुख बिंदुओं पर निर्णय ले सकता है क्या पुराना शो-कॉज नोटिस नए लाइसेंस पर लागू होता है? क्या दोषी व्यक्तियों का कंपनी से वैध और ठोस संबंध है? क्या सीधे हाई कोर्ट आना न्यायसंगत था?

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