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    HomeदुनियाStrait of Hormuz में बढ़ते तनाव से तेल बाजार में जबरदस्त उछाल

    Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव से तेल बाजार में जबरदस्त उछाल

    तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में छिड़ी सैन्य जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। गुरुवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 7.5 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया, जिससे तेल की कीमतें 103.70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। हालांकि, शुक्रवार को एशियाई बाजारों में मामूली गिरावट के साथ कीमतें 101.12 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज की गईं, लेकिन बाजार में असुरक्षा का माहौल अब भी बना हुआ है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव और जवाबी कार्रवाई

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरानी मिसाइलों, ड्रोनों और लड़ाकू नौकाओं ने अमेरिकी नौसेना के तीन युद्धपोतों को अपना निशाना बनाया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर जोरदार प्रहार किया है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका पर ही युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप मढ़ते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना ने उनके तेल टैंकरों और केशं आइलैंड जैसे नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया है। इस गोलाबारी और आरोप-प्रत्यारोप ने इस समुद्री मार्ग को एक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट और बंद होता व्यापारिक मार्ग

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। फरवरी महीने से ही इस जलमार्ग पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ी हुई है, जिससे ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। सैन्य संघर्ष की वजह से जहाजों के मार्ग बदलने और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    कीमतों में 40 प्रतिशत का उछाल और आर्थिक प्रभाव

    इस युद्ध के शुरू होने के बाद से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कुल 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द नहीं रुका और तेल की कीमतें इसी तरह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहीं, तो दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल तेल बाजार की नजरें दोनों देशों की अगली सैन्य गतिविधि और ओपेक (OPEC) देशों के रुख पर टिकी हुई हैं।

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