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    किसी ने IAS छोड़ शुरू किया कारोबार, किसी ने IPS से लिया VRS; अब सुजानिया का इस्तीफा

    भोपाल। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस और आईपीएस जैसे प्रतिष्ठित पदों पर आसीन होना देश के लाखों युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है। हालांकि, मध्य प्रदेश कैडर में ऐसे कई प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने इस सर्वोच्च सेवा का चयन करने के उपरांत भी अपने पदों से त्यागपत्र देकर एक नया रास्ता चुना। किसी ने शिक्षा के प्रसार और उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, तो किसी ने साइबर व अत्याधुनिक तकनीक की दुनिया में कदम रखने के लिए सरकारी सेवा को अलविदा कह दिया। हाल ही में वर्ष 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया द्वारा दिए गए इस्तीफे के बाद प्रशासनिक गलियारों में ऐसे अधिकारियों के निर्णयों की चर्चा एक बार फिर से तेज हो गई है।

    सर्वोच्च रैंक हासिल करने वाले आईएएस का शिक्षा क्षेत्र में कदम

    इस सूची में सबसे बहुचर्चित और प्रेरक नाम रोमन सैनी का माना जाता है, जिन्होंने वर्ष 2013 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 18वीं रैंक प्राप्त की थी। मध्य प्रदेश कैडर आवंटित होने के पश्चात उनकी पहली नियुक्ति जबलपुर जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर हुई थी। हालांकि, प्रशासनिक सेवा के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने नौकरी छोड़ने का एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया। इसके बाद दिसंबर 2015 में अपने सहयोगियों गौरव मुंजाल और हिमेश सिंह के साथ मिलकर उन्होंने एक विशाल ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म अनएकेडमी की नींव मजबूत की और आज वे इसके सफल सह-संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं। यानी जिस प्रतिष्ठित पद को पाने के लिए अभ्यर्थी सालों मेहनत करते हैं, उसे छोड़कर उन्होंने देश भर के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का मार्ग चुना।

    राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित आईपीएस का तकनीकी क्षेत्र में पदार्पण

    मध्य प्रदेश कैडर के 2013 बैच के जांबाज आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने भी जनवरी 2026 में अपनी सरकारी सेवा से अलग होने का निर्णय लिया था। उस समय वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के अंतर्गत राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जहाँ से उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली। नक्सल विरोधी अभियानों में उनकी सराहनीय कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बालाघाट जिले में एसपी के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं देने के लिए उन्हें दो बार प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक' से अलंकृत किया गया था। तिवारी ने साइबर टेक्नोलॉजी और उन्नत तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया था।

    सागर जिले से जुड़ाव और अनुराग सुजानिया के इस्तीफे की प्रक्रिया

    अभिषेक तिवारी और अनुराग सुजानिया के प्रशासनिक सफर में एक रोचक समानता सागर जिले से उनका संबंध रही है, क्योंकि दोनों ही अधिकारी वहां पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे। सुजानिया के कार्यकाल में सितंबर 2026 के दौरान बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला सामने आया था, जिसके बाद 27 अक्टूबर को उन्हें सागर एसपी के पद से स्थानांतरित कर पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) बनाया गया था। इस फेरबदल के महज चार दिनों के भीतर ही, 2 नवंबर को उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। फिलहाल उनका त्यागपत्र प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया में है, जिसे पुलिस महानिदेशक द्वारा गृह विभाग को प्रेषित किया गया है। अब गृह विभाग की अनुशंसा के पश्चात फाइल मुख्य सचिव से होते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जहाँ इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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