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    9 हजार से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में, पंजाब निकाय चुनाव 26 मई को

    चंडीगढ़। पंजाब के 105 नगर निकायों में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद अब चुनावी मैदान में 9 हजार से ज्यादा उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिए बचे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नामांकन पत्रों की जांच (छंटनी) के बाद कुल 10,096 प्रत्याशी रेस में थे, लेकिन मंगलवार को कई उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लिए जाने के बाद इस संख्या में बड़ी कमी आई है।

    26 मई को डाले जाएंगे वोट, 29 को आएंगे चुनावी नतीजे

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम सूची जारी किए जाने के बाद अब पंजाब के आठ नगर निगमों, 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के वार्डों में सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। इस महामुकाबले के लिए आगामी 26 मई को मतदान (वोटिंग) प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी, जबकि 29 मई को मतगणना (काउंटिंग) के तुरंत बाद नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा। वोटर अपने-अपने वार्ड के फाइनल प्रत्याशियों की सूची आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आसानी से देख सकते हैं।

    साल 2027 के विधानसभा चुनाव का 'सेमीफाइनल' है यह मुकाबला

    इस स्थानीय निकाय चुनाव को पंजाब की सियासत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल इसे साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का 'सेमीफाइनल' मानकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले निकाय चुनावों में कांग्रेस ने राज्य के सभी नगर निगमों पर एकतरफा जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार राज्य में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार होने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है। बुधवार से सभी दलों के दिग्गज नेता अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार अभियान को और तेज करेंगे।

    विपक्ष ने लगाए गड़बड़ी के आरोप, शिकायत के बाद अधिकारी पर गिरी गाज

    नामांकन और नाम वापसी की इस पूरी प्रक्रिया के बीच राज्य के विपक्षी दलों ने सत्तापक्ष पर कई जगहों पर धक्केशाही करने और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने में जानबूझकर देरी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष की इन शिकायतों पर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। मजीठा क्षेत्र से मिली एक गंभीर शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए वहां के एक कार्यकारी अधिकारी (EO) से उनका अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया है, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए जा सकें।

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