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    राजस्थान में पिकअप पलटी, 44 बच्चे घायल

    जयपुर|गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम देखकर लौट रहे स्कूली बच्चों से भरी एक पिकअप सोमवार दोपहर डीडवाना के खरवलिया क्षेत्र के पास पलट गई। हादसे में पिकअप में सवार करीब 50 बच्चों में से 44 बच्चे घायल हो गए। इनमें 3 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जयपुर रेफर किया गया है, जबकि 38 घायल बच्चों को डीडवाना के बांगड़ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं 3 बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।हादसा सोमवार दोपहर करीब 12:15 बजे हुआ। जैसे ही पिकअप पलटी, मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े और तत्काल रेस्क्यू शुरू किया गया। घायलों को पहले छोटी खाटू के राजकीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां संसाधनों की कमी के चलते सभी को डीडवाना जिला अस्पताल भेजा गया।जानकारी के अनुसार, सभी बच्चे नागौर जिले के भवाद गांव के रहने वाले हैं, जो मंडूकरा गांव के सरकारी स्कूल में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम देखकर लौट रहे थे। आरोप है कि एक ही पिकअप में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था।

    परिजनों का आरोप-प्रिंसिपल की लापरवाही से हुआ हादसा

    घटना के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चों को रोजाना भेड़-बकरियों की तरह पिकअप में भरकर लाया-ले जाया जाता है। हादसे के वक्त पिकअप सरकारी स्कूल का शिक्षक संतोष कुमार चला रहा था। परिजनों का आरोप है कि टीचर को वाहन चलाने का सही अनुभव नहीं था और प्रिंसिपल की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। परिजनों ने वाहन चला रहे शिक्षक को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।परिजन प्रभु सिंह ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल 10–20 हजार रुपये के लालच में बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहा था। ड्यूटी टाइम में ही शिक्षक पिकअप लेकर दूसरी जगह से बच्चों को लाने गया था।

    जिला अस्पताल में जुटी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल

    हादसे की सूचना मिलते ही भाजपा नेता जितेंद्र सिंह जोधा, एडीएम मोहनलाल खटवनालिया और डीटीओ सुप्रिया बिश्नोई डीडवाना जिला अस्पताल पहुंचे। वहीं डीडवाना थानाधिकारी राजेंद्र कमांडो भी पुलिस जाप्ते के साथ अस्पताल में मौजूद रहे और घायलों को वार्डों तक पहुंचाने में मदद की।भाजपा जिलाध्यक्ष सुनीता रान्धड़ भी घटना की जानकारी मिलने के बाद डीडवाना पहुंचीं। पूर्व विधायक चेतन डूडी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और घटना को स्कूल प्रशासन और सरकार दोनों की लापरवाही बताया।

    सिटी स्कैन के लिए निजी अस्पतालों का सहारा

    डीडवाना जिला अस्पताल होने के बावजूद सिटी स्कैन की सुविधा नहीं होने से कई घायल बच्चों को निजी केंद्रों पर ले जाकर जांच करवानी पड़ी। इससे परिजनों को आर्थिक भार झेलना पड़ा और बच्चों को अस्पताल से बाहर ले जाने-लाने में भी परेशानी हुई। वहीं अस्पताल के सर्जिकल वॉर्ड में बैड कम पड़ गए, जिससे एक ही बैड पर दो-दो बच्चों को लिटाना पड़ा।

    प्रत्यक्षदर्शी बोले—अचानक पलटी पिकअप

    मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले डॉक्टर दिलीप चौधरी ने बताया कि वे पिकअप के पीछे ही आ रहे थे। अचानक रास्ते में पिकअप पलटी हुई दिखाई दी और बच्चों में चीख-पुकार मची हुई थी। जितने बच्चों को कार में ले जा सकते थे, उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।छात्रा रिंकू ने बताया कि पिकअप में 35 से 40 बच्चे सवार थे। अचानक झटका लगा और गाड़ी पलट गई, इसके बाद सभी बच्चे घबरा गए।

    डीटीओ बोले—बाल वाहिनी नहीं थी पिकअप

    डीटीओ सुप्रिया बिश्नोई ने बताया कि यह पिकअप डीप एरिया में चल रही थी और इसे लेकर पहले कोई शिकायत नहीं आई थी। यह बाल वाहिनी नहीं थी, इसलिए रूटीन कार्रवाई नहीं हो पाई।फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है और प्रशासनिक टीमें अलर्ट मोड पर हैं।

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