More
    Homeराजनीतिउत्तर-दक्षिण प्रतिनिधित्व पर सियासत तेज, आधव अर्जुन ने केंद्र के सामने रखा...

    उत्तर-दक्षिण प्रतिनिधित्व पर सियासत तेज, आधव अर्जुन ने केंद्र के सामने रखा सवाल

    चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्तावित लोकसभा परिसीमन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के खेल मंत्री आधव अर्जुन ने परिसीमन के खिलाफ पारित प्रस्ताव का कड़ा समर्थन करते हुए कहा कि यदि आबादी को आधार बनाकर लोकसभा सीटों का पुनर्गठन किया गया, तो इससे तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बेहद कमजोर हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि इस व्यवस्था से राष्ट्रीय राजनीति में उत्तर भारत का वर्चस्व और अधिक बढ़ जाएगा।

    राज्यों की स्वायत्तता और 'दक्षिण से प्रधानमंत्री' का मुद्दा

    मंत्री आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया कि यह विषय किसी राजनीतिक दल विशेष (कांग्रेस बनाम भाजपा) का नहीं, बल्कि राज्यों की स्वायत्तता और उनके अधिकारों की रक्षा का है। उन्होंने कहा:

    • राजनीतिक संतुलन: देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए ताकि भविष्य में तमिलनाडु और दक्षिण भारत से भी कोई नेता प्रधानमंत्री पद तक पहुंच सके।

    • उत्तर भारत का प्रभाव: परिसीमन के मौजूदा स्वरूप से तमिलनाडु के उत्तर भारतीय वर्चस्व के अधीन होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

    संसद में कम प्रतिनिधित्व से नीतिगत फैसलों पर असर

    सदन को संबोधित करते हुए मंत्री ने दावा किया कि संसद में पर्याप्त सीटें न होने के कारण केंद्र सरकार ऐसे कानून लागू कर देती है, जिनका तमिलनाडु लगातार विरोध करता रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राज्य के पास संसद में 100 प्रतिनिधि होते, तो क्या नीट (NEET), जीएसटी (GST) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) जैसे फैसले इसी तरह लागू किए जा सकते थे?

    वित्तीय असमानता और 543 सीटों की सीमा बनाए रखने की मांग

    वित्तीय पहलुओं का जिक्र करते हुए आधव अर्जुन ने कहा कि तमिलनाडु केंद्र को दिए जाने वाले हर एक रुपये के बदले केवल 29 पैसे ही वापस पाता है। सीटों की संख्या बढ़ाने पर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अत्यधिक आबादी वाले राज्यों की तुलना में दक्षिण का असंतुलन और बढ़ेगा। इसलिए उन्होंने मांग की कि परिसीमन का आधार चाहे जो भी हो, देश में कुल लोकसभा सीटों की संख्या 543 ही रखी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के सभी 39 सांसदों से एकजुट होकर संसद में इसके खिलाफ मतदान करने की अपील की।

    भाजपा विधायक भोजराजन ने परिसीमन को बताया आवश्यक

    खेल मंत्री के रुख के विपरीत, भारतीय जनता पार्टी के विधायक भोजराजन ने परिसीमन का समर्थन किया। उन्होंने विधानसभा के प्रस्ताव को अनावश्यक बताते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या और तेजी से बदलते शहरीकरण के दौर में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, जब गांव नगर पंचायतों में और कस्बे शहरों में बदल रहे हों, तब जनसांख्यिकी के हिसाब से सीटों का विस्तार होना स्वाभाविक और व्यावहारिक कदम है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here