वाशिंगटन | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप और पोप लियो XIV के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पोप पर निशाना साधा है, वहीं पोप ने वैश्विक शांति की अपील करते हुए हिंसा को त्यागने का संदेश दिया है।
दुनिया को शांति चाहिए- पोप
पोप लियो XIV ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को युद्ध और हिंसा की सोच से बाहर निकलना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति प्रेम और न्याय पर आधारित होनी चाहिए, न कि डर, हथियारों या धमकियों पर। उन्होंने लिखा कि दुनिया को शांति चाहिए। अब युद्ध और उससे होने वाली मौत, विनाश और विस्थापन को रोकना होगा।पोप ने यह भी स्पष्ट किया कि सच्ची शांति जबरदस्ती से नहीं आती, बल्कि यह विश्वास, सहानुभूति और उम्मीद पैदा करती है। उन्होंने निर्अस्त्र शांति की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि यही मॉडल दुनिया को स्थिरता की ओर ले जा सकता है।
पोप का रुख वास्तविकता से दूर है- ट्रंप
दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने पोप के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने हाल के महीनों में हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार दिया है और ऐसे देश को परमाणु हथियार हासिल करने देना पूरी तरह अस्वीकार्य है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोप की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि पोप का रुख वास्तविकता से दूर है। ट्रंप ने पहले भी पोप की आलोचना करते हुए उन्हें कमजोर बताया था और माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि वे पोप की राय से सहमत नहीं हैं और अपनी नीतियों पर कायम रहेंगे।
पोप ने राजनीतिक विवाद में उलझने से इनकार किया
हालांकि, पोप ने इस राजनीतिक विवाद में उलझने से इनकार किया है। अल्जीरिया की यात्रा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राजनीति में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा कि मैं कोई राजनेता नहीं हूं और न ही मेरी किसी राजनीतिक बहस में शामिल होने की मंशा है। लोग खुद निष्कर्ष निकाल सकते हैं।पोप ने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक संदेशों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और उनका ध्यान केवल वैश्विक शांति और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और वेटिकन के बीच वैचारिक टकराव को उजागर कर दिया है, जहां एक तरफ सुरक्षा और शक्ति की राजनीति है, तो दूसरी तरफ शांति और नैतिक मूल्यों की अपील।


