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    जौहर विश्वविद्यालय की सड़क पर आम लोगों का अधिकार, 10 साल बाद बदली व्यवस्था

    रामपुर| समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट 'मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय' की मुश्किलें एक बार फिर बेहद बढ़ गई हैं। परिसर के भीतर सरकारी धन से बनी लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबी सड़क को लोक निर्माण विभाग (PWD) ने आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है। विभाग ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अपना बोर्ड लगाकर इसे सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय परिसर में बिना नक्शा पास कराए बनाए गए 38 आलीशान भवनों को अवैध घोषित करते हुए उन्हें ध्वस्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया गया है। इन दोनों कार्रवाइयों से हड़कंप मच गया है।

    PWD की कार्रवाई: 13 करोड़ की लागत से बनी सड़क अब जनता के नाम

    सरकारी बजट के दुरुपयोग के एक पुराने मामले में एक्शन लेते हुए लोक निर्माण विभाग ने यह कदम उठाया है। इस सड़क के इतिहास और वर्तमान स्थिति को लेकर विभाग ने पूरी रूपरेखा साफ कर दी है:

    मुलायम सिंह सरकार के दौरान रखी गई थी नींव

    इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2003-04 में हुई थी, जब प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा सरकार कार्यरत थी। उस दौरान आजम खां ने जौहर विश्वविद्यालय के प्रस्तावित ब्लूप्रिंट में शामिल मुख्य रास्ते का उपयोग करते हुए लोक निर्माण विभाग के माध्यम से इस साढ़े तीन किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू कराया था।

    अखिलेश सरकार में हुआ चौड़ीकरण, 13 करोड़ रुपये हुए थे खर्च

    राज्य में जब दोबारा समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तो विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में तेजी आई। मई 2016 में त्वरित आर्थिक विकास योजना के अंतर्गत इस मार्ग को और चौड़ा करने के लिए 17 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया। इसमें से 13 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करके सड़क का कायाकल्प किया गया था।

    2019 की जांच रिपोर्ट के बाद लिया गया बड़ा निर्णय

    निजी स्वामित्व वाले विश्वविद्यालय के अंदर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की शिकायत मिलने पर साल 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने नौ अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम गठित की थी। जांच में पाया गया कि निजी कैंपस के अंदर सरकारी पैसे से ऐशो-आराम के बुनियादी ढांचे तैयार किए गए। तत्कालीन डीएम ने इसे वित्तीय भ्रष्टाचार मानते हुए अंतिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेज दी थी, जो लंबे समय बाद अब धरातल पर उतरी है।

    "जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर बनी यह सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसे अब पूर्ण रूप से आम रास्ता घोषित कर दिया गया है और इसका आधिकारिक बोर्ड भी लगा दिया गया है। अब इस मार्ग से कोई भी आम नागरिक बिना किसी रोक-टोक के गुजर सकता है।"केवी सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग

    रामपुर विकास प्राधिकरण का हथौड़ा: 20 दिनों में ढहाए जाएंगे 38 भवन

    सड़क को सार्वजनिक संपत्ति घोषित करने के साथ ही रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को सबसे बड़ा झटका दिया है। परिसर में बने कुल 40 भवनों में से 38 भवनों पर बुलडोजर चलने का रास्ता साफ हो गया है।

    व्यक्तिगत सुनवाई में खारिज हुईं विश्वविद्यालय की दलीलें

    आरडीए (RDA) के उपाध्यक्ष और जिला मजिस्ट्रेट अजय कुमार द्विवेदी ने कुछ दिनों पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन को अवैध निर्माण के संबंध में एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में बुधवार को प्राधिकरण के समक्ष एक व्यक्तिगत सुनवाई का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार, कानूनी सलाहकार और प्रतिनिधि शामिल हुए।

    सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय पक्ष ने तर्क दिया कि:

    • यह पूरा परिसर 'सींगनखेड़ा' गांव की जमीन पर स्थित है।

    • 27 सितंबर 2024 से पहले तक सींगनखेड़ा गांव आरडीए के विकास या नियंत्रण क्षेत्र में शामिल नहीं था।

    • यह क्षेत्र किसी नगर पालिका के अंतर्गत भी नहीं आता था, इसलिए उस समय आरडीए से कोई नक्शा स्वीकृत कराने की विधिक आवश्यकता नहीं थी।

    प्राधिकरण ने पकड़ा विरोधाभास: जब दो भवनों का नक्शा पास था, तो बाकी का क्यों नहीं?

    प्राधिकरण के उपाध्यक्ष/डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय के इन तर्कों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आरडीए ने अपने फैसले में साफ कहा कि यदि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर के मुख्य 'मेडिकल भवन' और 'अकादमिक ब्लॉक' का नक्शा जिला पंचायत से क्यों पास करवाया था?

    दो प्रमुख भवनों का नक्शा वैध तरीके से पास कराना यह साबित करता है कि प्रबंधन को निर्माण संबंधी नियमों की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद शेष 38 भवनों का कोई नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया।

    उत्तर प्रदेश नगर नियोजन अधिनियम के तहत ध्वस्तीकरण का आदेश

    बिना किसी स्वीकृत मानचित्र के बनाए गए इन 38 भवनों को पूरी तरह अवैध निर्माण मानते हुए आरडीए ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत उनके ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश पारित कर दिया है।

    इस आदेश के लागू होने के बाद अब इस विशाल विश्वविद्यालय में केवल दो ही इमारतें (अकादमिक ब्लॉक और मेडिकल बिल्डिंग) सुरक्षित बचेंगी, बाकी का हिस्सा ढहा दिया जाएगा।

    कड़ा निर्देश: आरडीए ने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिवादी (विश्वविद्यालय प्रबंधन) अगले 20 दिनों के भीतर इन सभी अवैध निर्माणों को अपने खर्च पर खुद हटा ले और प्राधिकरण को सूचित करे। यदि तय समय सीमा के भीतर ऐसा नहीं किया गया, तो रामपुर विकास प्राधिकरण खुद बुलडोजर चलाकर इन ढांचों को ध्वस्त कर देगा। ऐसी स्थिति में, तोड़फोड़ में आने वाला जो भी खर्च होगा, उसे अधिनियम की धारा 40 के तहत भू-राजस्व (Land Revenue) के बकाए की तरह विश्वविद्यालय प्रशासन से ही वसूल किया जाएगा।

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