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    बच्चों के पोषण पर सवाल, आंगनबाड़ी में खराब भोजन परोसने का मामला सामने आया

    श्योपुर  | मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के दावों की पोल खुल गई है। यहां आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों को परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन (पोषण आहार) की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। मामला चंद्रपुरा ग्राम पंचायत के एक आंगनबाड़ी केंद्र का है, जहां मासूम बच्चों की थाली में कीड़े तैरती हुई दाल परोसी गई। इस पूरी लापरवाही का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें पकी हुई दाल के अंदर साफ तौर पर कीड़े रेंगते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

    बच्चों की थाली में रेंगते मिले कीड़े, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

    चंद्रपुरा के आंगनबाड़ी केंद्र में जब बच्चों को भोजन परोसा गया, तो दाल के ऊपर बड़े-बड़े सफेद कीड़े तैर रहे थे। जैसे ही इसकी भनक बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों को लगी, वे तुरंत केंद्र पर इकट्ठा हो गए और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस केंद्र पर पिछले काफी समय से बच्चों को बेहद निम्न स्तर का और अखाद्य भोजन दिया जा रहा है। कई बार मौखिक और लिखित तौर पर आपत्ति जताने के बाद भी विभाग के आलाधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

    लगातार अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने खुद बनाया वीडियो

    स्थानीय निवासियों ने बताया कि पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन आपूर्ति (सप्लाई) का जिम्मा एक ही स्व सहायता समूह के पास है। समूह द्वारा बार-बार खराब खाना दिए जाने की शिकायतें की गईं, लेकिन जब कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो शुक्रवार को दाल में कीड़े दिखने पर ग्रामीणों ने स्वयं इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इंटरनेट पर वीडियो वायरल होते ही विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।

    प्रशासन ने समूहों को हटाया, नियमित निरीक्षण की मांग

    वीडियो के जरिए मामला गर्माने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और आनन-फानन में जांच के निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भोजन सप्लाई करने वाले संबंधित दोनों समूहों को काम से हटा दिया है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सेहत और पोषण की गुणवत्ता से कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, ग्रामीण इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं; उनका कहना है कि व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए केंद्रों का नियमित औचक निरीक्षण होना चाहिए ताकि भविष्य में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा न हो।

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