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    राम मंदिर में चढ़ावे पर सवाल, पांच वर्षों का ऑडिट खोल सकता है कई राज

    अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेरफेर और चोरी के मामले में आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में राम मंदिर में पिछले पांच सालों के दौरान आए पूरे चढ़ावे का गहन फॉरेंसिक ऑडिट (Scrutiny of Accounts) कराने की बेहद महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए कई कड़े सुझाव भी दिए गए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री लेंगे।

    कई वर्षों से चल रहा था हेरफेर का खेल

    एसआईटी ने अपनी शुरुआती तफ्तीश में कई चौंकाने वाले और अहम तथ्य शामिल किए हैं। जांच टीम को कुछ ऐसे पुख्ता साक्ष्य (सबूत) मिले हैं, जिनसे यह गंभीर आशंका पैदा हो गई है कि चढ़ावे में हेरफेर और गड़बड़ी का यह पूरा खेल कोई नया नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार पर्दे के पीछे चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव करने, चढ़ावे की गिनती और जमा करने की व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता (Transparency) लाने के कड़े निर्देश शामिल हैं। इस रिपोर्ट के आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचने के बाद ही शासन स्तर से कोई बड़ा आधिकारिक बयान या आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

    ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की उठी मांग

    दूसरी तरफ, इस मामले के सामने आने के बाद संतों और धार्मिक संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामले को लेकर मचे घमासान के बीच 'धर्मसेना' के अध्यक्ष संतोष दुबे ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग (Dismiss) कर दिया जाए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और उनकी गाढ़ी कमाई के दान के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार को तुरंत दखल देकर एक पारदर्शी और नई व्यवस्था कायम करनी चाहिए।

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