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    एके एंटनी की सलाह के बाद बदला राहुल गांधी का रुख, कांग्रेस में नई चर्चा

    तिरुवनंतपुरम: केरल में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पिछले दस दिनों से जारी कड़ा सस्पेंस आखिरकार गुरुवार को समाप्त हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने काफी माथापच्ची के बाद वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है, जबकि इस रेस में आगे चल रहे केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर हो गए हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे फैसले में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता एके एंटनी की भूमिका अत्यंत निर्णायक रही, जिन्होंने राहुल गांधी को जमीनी हकीकत समझाते हुए अपना रुख बदलने के लिए प्रेरित किया।

    राहुल गांधी की पसंद पर भारी पड़ा जमीनी समर्थन

    रणनीतिक चर्चाओं के शुरुआती दौर में लोकसभा सांसद और पार्टी के बड़े राष्ट्रीय चेहरे केसी वेणुगोपाल को आलाकमान का मजबूत समर्थन हासिल था, और अधिकांश नवनिर्वाचित विधायक भी उनके पक्ष में लामबंद थे। इसके विपरीत, केरल कांग्रेस के स्थानीय संगठन, गठबंधन के सहयोगी दलों और जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच वीडी सतीशन के नाम को लेकर जबरदस्त उत्साह था। सतीशन को जनता के बीच गहरी पैठ रखने वाले और विपक्ष के सबसे मुखर चेहरे के रूप में देखा जाता है। जब मुख्यमंत्री पद को लेकर राज्य और दिल्ली के बीच गुटबाजी और खींचतान बढ़ने लगी, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने संकटमोचक माने जाने वाले एके एंटनी की शरण ली।

    एके एंटनी की सलाह पर आलाकमान ने बदला फैसला

    सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में शुमार एके एंटनी ने साफ शब्दों में आलाकमान को संदेश दिया कि केरल की जनता और जमीनी संगठन वीडी सतीशन के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि एंटनी की इस दो टूक राय के बाद सोनिया और राहुल गांधी के बीच मैराथन बैठक हुई, जिसमें वेणुगोपाल को पीछे हटने के लिए राजी किया गया। आखिरकार, व्यापक जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राहुल गांधी भी सतीशन को कमान सौंपने पर सहमत हो गए। एके एंटनी का कांग्रेस में यह प्रभाव कोई नया नहीं है; वे पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में देश के रक्षा मंत्री जैसे अहम पद संभाल चुके हैं और केरल के तीन बार मुख्यमंत्री रहने का उनके पास एक लंबा राजनीतिक अनुभव है।

    एंटनी की ऐतिहासिक रिपोर्ट और कांग्रेस की बदली रणनीति

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल से लेकर दिल्ली तक आज भी एंटनी की राय को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण साल 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद गठित हुई "एके एंटनी कमेटी" है, जिसने हार के कारणों की एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार की थी। उस ऐतिहासिक रिपोर्ट में एंटनी ने साफ लिखा था कि कांग्रेस पर लगातार लग रहे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोपों के कारण बहुसंख्यक हिंदू मतदाता पार्टी से दूर हो गए हैं। माना जाता है कि इसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक लाइन बदलते हुए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के रास्ते पर चलना शुरू किया था।

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