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    मध्य प्रदेश में आज राहत, 16 जुलाई से फिर तेज बारिश की संभावना

    भोपाल: मध्य प्रदेश में जुलाई के शुरुआती दिनों में तूफानी रफ्तार दिखाने के बाद मानसून की चाल अब धीमी पड़ गई है। सूबे के तकरीबन 60 फीसदी इलाकों से घने मानसूनी बादलों की विदाई हो चुकी है। यही कारण है कि बीते चार-पांच दिनों से राज्य के किसी भी हिस्से में मूसलाधार बारिश देखने को नहीं मिली है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी कुछ दिनों तक प्रदेशवासियों को भारी बरसात के बजाय केवल हल्की रिमझिम फुहारों से ही संतोष करना पड़ेगा।

    चुनिंदा जिलों में फुहारें, बड़े शहरों में खिली रहेगी धूप

    मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और आलीराजपुर जैसे क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। इसके विपरीत राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित प्रदेश के 33 जिलों में मौसम साफ रहने की उम्मीद है, जहां लोगों को चटक धूप का सामना करना पड़ सकता है।

    कमजोर पड़ी प्रणालियां, 16 जुलाई से नए सिस्टम की आस

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम मानसून को रफ्तार देने वाले मौसमी सिस्टम या तो पूरी तरह ठंडे पड़ चुके हैं या उनका रुख मध्य प्रदेश की सीमा से दूर हो गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 13 से 19 जुलाई के मध्य उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) आकार ले सकता है। यदि यह सिस्टम मजबूत होकर निम्न दबाव के क्षेत्र में तब्दील होता है, तो 16 जुलाई से सूबे में झमाझम बारिश का एक नया दौर शुरू हो सकता है। इसके साथ ही प्रशांत महासागर में भी तीन नए सिस्टम सक्रिय हो रहे हैं, जो बंगाल की खाड़ी में पहुंचकर मानसून को अतिरिक्त ताकत दे सकते हैं।

    बारिश का ग्राफ गिरा, देवास में सबसे ज्यादा तो आलीराजपुर सूखा

    लगातार पांच दिनों से तेज बारिश न होने के कारण प्रदेश में बारिश का औसत ग्राफ तेजी से नीचे आया है। कुछ समय पहले तक जो बारिश सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक चल रही थी, वह अब सिमटकर महज एक प्रतिशत पर आ गई है। प्रदेश में अब तक कुल कोटे की करीब 25 प्रतिशत (9.5 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य औसत के बिल्कुल नजदीक है। जिलों की बात करें तो देवास इस सीजन में 18 इंच बारिश के साथ सबसे आगे है, जो सामान्य से 102 फीसदी अधिक है। वहीं, आलीराजपुर में हालात सबसे चिंताजनक हैं, जहां सामान्य से 74 प्रतिशत कम यानी केवल सवा दो इंच पानी ही बरसा है।

    जुलाई महीने से टिकीं उम्मीदें

    भले ही जून और जुलाई का यह हफ्ता कमजोर रहा हो, लेकिन मध्य प्रदेश में जुलाई को मानसून का सबसे खास महीना माना जाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे सीजन की करीब 40 फीसदी बारिश अकेले इसी महीने में होती है। उदाहरण के तौर पर, भोपाल में पूरे सीजन की 39 इंच बारिश में से 14 इंच और जबलपुर में औसतन 17 इंच से ज्यादा पानी अकेले जुलाई के महीने में ही बरसता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाले नए वेदर सिस्टम से किसानों और आम जनता को काफी उम्मीदें हैं।

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