बहराइच: नेपाल में हाल ही में सामने आए सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक घटनाक्रम के बाद 'हिंदू राष्ट्र' की बहाली का मुद्दा एक बार फिर देश की मुख्य राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। जनकपुर में देश के गृह मंत्री सुधन गुरुंग और विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच संपन्न हुई 13 सूत्रीय वार्ता में आगामी तीन महीनों के भीतर हिंदू राष्ट्र के विषय पर सर्वदलीय चर्चा कराने की मांग उठी है। इस अहम घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) ने इस मुद्दे को संसद के पटल पर जोरदार ढंग से उठाने के लिए अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है।
राप्रपा की संसद में सक्रियता और पुरानी मांग
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी लंबे समय से संवैधानिक राजतंत्र और नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने की वकालत अपने मुख्य राजनीतिक एजेंडे के रूप में करती रही है। राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बु ओली ने प्रतिनिधि सभा में गृह मंत्री और हिंदू मोर्चे के बीच हुई वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना को लेकर जो प्रतिबद्धता नजर आई है, उसे अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
सुनसरी की हालिया हिंसा पर सरकार की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश में संवैधानिक राजतंत्र के साथ हिंदू राष्ट्र की पहचान थी, तब समाज आज की तुलना में कहीं अधिक सहिष्णु और संतुलित था। इस विषय पर किसी भी प्रकार की कोरी भावनाओं के बजाय पुख्ता प्रमाणों और गंभीर वैचारिक बहस के आधार पर समीक्षा की जानी चाहिए।
राप्रपा के संसदीय दल के नेता ज्ञानेंद्र शाही भी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी संसद के माध्यम से इस राष्ट्रव्यापी मुद्दे को मजबूती से आगे बढ़ाएगी। पार्टी अध्यक्ष राजेंद्र लिङ्देन भी कई मौकों पर दोहरा चुके हैं कि पार्टी ने अपने मूल वैचारिक एजेंडे—राजतंत्र, हिंदू राष्ट्र और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष—से कभी कोई समझौता नहीं किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में राजशाही के खात्मे के बाद नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया था, जबकि उससे पहले नेपाल दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था।
जनकपुर समझौते के बाद थमा था विरोध प्रदर्शन
ज्ञात हो कि नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर आंदोलनरत 'संयुक्त हिंदू मोर्चा' और सरकार के बीच गत 1 अगस्त 2026 को धनुषा जिले के प्रशासनिक कार्यालय में उच्चस्तरीय वार्ता का दौर शुरू हुआ था। दो चरणों की लंबी बातचीत के बाद उसी दिन मध्य रात्रि को दोनों पक्षों के बीच 13 सूत्रीय ऐतिहासिक सहमति बनी। सरकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने किया था, जिसमें धनुषा के प्रमुख जिला अधिकारी प्रेम प्रसाद लुइटेल भी शामिल रहे।
इस समझौते के बाद संयुक्त हिंदू मोर्चा ने जनकपुर में चल रहे अपने सभी विरोध प्रदर्शनों और बंद के आह्वान को स्थगित कर दिया था। इस समझौते में मुख्य रूप से हिंदू राष्ट्र के सवाल पर आगामी राजनीतिक प्रक्रिया और सर्वदलीय चर्चा कराने की बात शामिल थी, जिसके बाद से नेपाली सियासत में सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है।


