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    राजस्थान शिक्षा बोर्ड की किताब पर बवाल, 80% किताबें स्कूलों में पहुंचीं, अब वापसी का आदेश

    जयपुर – राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12वीं की इतिहास की पुस्तक ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत’ में कांग्रेस नेताओं के "अधिक गुणगान" और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की अनदेखी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पुस्तक के वितरण पर रोक लगा दी है।

    क्या है विवाद?

    विवादित पुस्तक में गांधी-नेहरू परिवार सहित कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर विस्तार से जानकारी दी गई है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान का उल्लेख नगण्य बताया गया है। इस "असंतुलित" प्रस्तुति पर मंत्री ने नाराजगी जताई।

    किताबों की छपाई और वापसी का फैसला

    राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल ने नए सत्र 2025 के लिए 4.90 लाख पुस्तकें छपवाई थीं, जिनमें से 80% स्कूलों में पहुंच चुकी थीं। अब इन पुस्तकों को वापस लेने और वितरण रोकने का निर्णय लिया गया है। विपक्ष ने इसे "वैचारिक हस्तक्षेप" करार दिया है।

    बोर्ड अधिकारी पर कार्रवाई

    इस विवाद के बीच बोर्ड के सीनियर असिस्टेंट डायरेक्टर दिनेश कुमार ओझा को हटाकर उन्हें बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय में स्थानांतरित कर APO कर दिया गया है। इससे पहले एकेडमिक निदेशक राकेश स्वामी को भी इसी तरह हटाया गया था।

    ओझा का पक्ष

    दिनेश ओझा ने कहा कि यह पुस्तक सरकार की अनुमति से छपी थी और 2026-27 में सिलेबस में बदलाव प्रस्तावित है। उन्होंने खुद पर हुई कार्रवाई पर निराशा जताई लेकिन आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    शिक्षामंत्री का सख्त रुख

    मदन दिलावर ने स्पष्ट कहा कि भले ही आर्थिक नुकसान हो, लेकिन बच्चों को "गलत जानकारी या वैचारिक ज़हर" नहीं पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, "ऐसी एकतरफा सामग्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

    कांग्रेस का पलटवार

    कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह कदम "शिक्षा पर वैचारिक हमला" है। उन्होंने कहा, "नेहरू, इंदिरा, राजीव और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के योगदान को मिटाया नहीं जा सकता। क्या सरकार बच्चों से सच्चाई छिपाना चाहती है?"

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