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    Salary Hike 2026: इस साल 9.1 फीसदी बढ़ेगा कर्मचारियों का वेतन, GCC में सर्वाधिक वृद्धि; रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    भारतीय कंपनियां इस साल वेतन में औसतन 9.1 फीसदी की वृद्धि कर सकती हैं। हालांकि, यह 2025 के 9.3 फीसदी की अनुमानित वृद्धि से थोड़ा कम है। ईवाई ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा, कंपनियां कौशल आधारित वेतन ढांचे और बेहतर प्रदर्शन पर जोर दे रही हैं। कंपनियां वेतन वृद्धि के लिए इन मानकों को ही आधार बना रही हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) में सबसे ज्यादा 10.4 फीसदी वेतन वृद्धि की उम्मीद है। वित्तीय सेवा क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन करीब 10 फीसदी बढ़ सकता है। ई-कॉमर्स में 9.9 फीसदी और लाइफसाइंसेज एवं फार्मास्यूटिकल्स में 9.7 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।रिपोर्ट में कहा गया है कि 45-50 फीसदी भारतीय कंपनियां कौशल आधारित वेतन ढांचे पर जोर दे रही हैं। एआई, जेनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग और इंजीनियरिंग जैसी नई टेक्नोलॉजी भूमिकाओं में 40 फीसदी तक वेतन वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उच्च और औसत प्रदर्शन के बीच का अंतर बढ़ गया है। उच्च प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के वेतन में करीब 120-150 फीसदी और औसत प्रदर्शन वाले कर्मियों के वेतन में 60-80 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है।

    15 फीसदी तक बढ़ रहा सीईओ का वेतन

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में निफ्टी की शीर्ष-200 कंपनियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) का औसत कंपनसेशन (मुआवजा) बढ़कर 7-9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह सालाना आधार पर 12-15 फीसदी की बढ़ोतरी को दिखाता है। ईवाई के मुताबिक, इसमें से फिक्स्ड वेतन कुल सीईओ कंपनसेशन का 25-30 फीसदी है। शॉर्ट-टर्म इंसेंटिव (प्रोत्साहन) की हिस्सेदारी 25-30 फीसदी है, जबकि लॉन्ग-टर्म प्रोत्साहन का 45-50 फीसदी योगदान है। एनएसई-200 कंपनियों में से करीब 75 फीसदी लॉन्ग-टर्न प्रोत्साहन देती हैं, जो सीईओ के कंपनसेशन का एक मानक हिस्सा बन जाता है।

    नौकरी छोड़ने की दर में गिरावट

    रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 2025 में घटकर 16.4 फीसदी रह गई, जो एक साल पहले 17.5 फीसदी रही थी। यह गिरावट श्रम बाजार में सुस्ती के चलते आई है, जहां कर्मचारियों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई है।80 फीसदी ज्यादा कर्मचारी मर्जी से नौकरी छोड़ रहे हैं। ज्यादातर एट्रिशन कर्मचारी और अवसर आधारित हैं, न कि पुनर्गठन की वजह से।वित्तीय सेवा क्षेत्र में नौकरी छोड़ने की दर सबसे ज्यादा 24 फीसदी रही। खासकर सेल्स, रिलेशनशिप मैनेजमेंट और डिजिटल भूमिकाओं में।पेशेवरों सेवाओं में एट्रिशन रेट 21.3 फीसदी रही, जबकि हाई-टेक और आईटी क्षेत्र में नौकरी छोड़ने की दर 20.5 फीसदी रही।वैश्विक क्षमता केंद्रों यानी जीसीसी में एट्रिशन रेट सबसे कम 14.1 फीसदी रही।वेतन का भविष्य सिर्फ सालाना इंक्रीमेंट पर निर्भर नहीं ईवाई इंडिया के पार्टनर एवं लीडर अभिषेक सेन ने कहा, भारत में वेतन का भविष्य अब सिर्फ सालाना इंक्रीमेंट के साइज से तय नहीं होता। कंपनियां अब तय कर रही हैं कि किस कौशल में निवेश करना है और किन नतीजों को प्रोत्साहित करना है। रिवॉर्ड रणनीति ज्यादा सोच-समझकर बनाई जा रही हैं, जिसमें फैसले लेने के लिए डाटा का बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।

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